मुंबई. राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) बहुमत से पारित होने के साथ ही बुधवार को महाराष्ट्र कैडर के एक आईपीएस अधिकारी ने विधेयक के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए इस्तीफा दे दिया।

वरिष्ठ अधिकारी अब्दुर्रहमान ने मुंबई में महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में पुलिस महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी थे। उन्होंने ट्वीट कर अपने त्यागपत्र की जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक संविधान के मूल ढाँचे के ख़िलाफ़ है।

ट्विटर पर उन्होंने लिखा है, “ये विधेयक भारत की धार्मिक विविधता के ख़िलाफ़ है। मैं न्यायप्रिय सभी लोगों से अपील करता हूँ कि वे लोकतांत्रिक तरीक़े से इसका विरोध करें। ये विधेयक संविधान के मूल ढाँचे के ख़िलाफ़ है।”

अब्दुर्रहमान ने वीआरएस (स्वैच्छिक रिटायरमेंट स्कीम) को लेकर महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी भी ट्वीट की है, जिसमें लिखा गया है कि उन्होंने इस साल अगस्त में वीआरएस के लिए आवेदन किया था, लेकिन 25 अक्तूबर को वो आवेदन रद्द कर दिया गया।

उन्होंने इसके ख़िलाफ़ नवंबर में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्राइब्यूनल में भी अपील की है। अभी इस मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। अब्दुर्रहमान ने लिखा है कि अभी उनके आवेदन पर कोई आख़िरी फ़ैसला नहीं आया है। लेकिन इस बीच कैब के ख़िलाफ़ उन्होंने 12 दिसंबर से नौकरी छोड़ने का फ़ैसला किया है।

रहमान ने कहा, ‘सदन में विधेयक पारित होने के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने गलत तथ्य, तर्क और भ्रामक सूचनाएं दीं। इतिहास तोड़-मरोड़कर पेश किया। इस विधेयक के पीछे की मानसिकता मुस्लिमों में डर फैलाना और देश का विभाजन करना है। यह विधेयक अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।’

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