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केरल के प्रमुख सुन्नी नेता और मुस्लिम जमात कंथापुरम के अध्यक्ष एपी अबूबेकर मुस्लीयार ने कहा है कि उनका संगठन वयस्कों के बीच समान-सेक्स संबंधों को वैध बनाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में विस्तार से चर्चा करेगा।

शुक्रवार को एक प्रैस वार्ता में सवालों के जवाब में, मुस्लीयार ने कहा कि उन्हें जवाब देने से पहले फैसले का विस्तार से जानने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा, “यदि आवश्यक होगा तो हम प्रधान मंत्री से मिलेंगे और साथ ही सर्वोच्च न्यायालय भी जाएँगे”

केरल में प्रमुख सुन्नी संप्रदायों से जुड़े कई मुस्लिम संगठन, पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ सार्वजनिक रूप से विरोध जता चुके हैं। इस बारे में मरकज सकाफती सुन्निया ने कहा कि आदेश के परिणामस्वरूप अपराधों में वृद्धि होगी, लेकिन यह भी कहा कि इससे यौन अल्पसंख्यकों से जुड़ी कलंक दूर हो जाएगी।

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सुन्नी मुस्लिम उलेमाओं के संगठन ने कहा कि इस्लाम में समलैंगिकता एक गंभीर पाप है, साथ ही समलैंगिकता मानव के लिए प्रकृति के भी खिलाफ है। वहीं केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (केसीबीसी) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” कहा है।

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बता दें कि सेक्शन 377 के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने फैसला सुनाते हुए आज LGBT समुदाय के रिश्तों को मान्यता प्रदान कर दी है। बेंच ने गुरुवार को एकमत से 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के उस हिस्से को निरस्त कर दिया जिसके तहत सहमति से परस्पर अप्राकृतिक यौन संबंध अपराध था।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी और 10 जुलाई को सुनवाई शुरु होने के बाद 17 जुलाई को मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जहां तक एकांत में परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन कृत्य का संबंध है तो यह न तो नुकसानदेह है और न ही समाज के लिए संक्रामक है।

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