बेंगलुरु दंगों को लेकर 28 मुस्लिम समूहों ने मिलकर कर्नाटक मुस्लिम मुत्ताहिदा महाज के बैनर तले 22 जनवरी को शांतिपूर्ण बंद का आह्वान किया है। बंद को उन “निर्दोषों” के समर्थन में बुलाया गया है जो बेंगलुरु दंगों के मामले में जेल गए हैं।

सभी समूहों ने शहर में केजी हल्ली और डीजे होली दंगों में गिरफ्तार किए गए “निर्दोष युवाओं” को छोड़ने की मांग की है।समूह ने मुस्लिम व्यापारियों से सुबह से शाम 5 बजे तक अपनी दुकानें बंद करने का आग्रह किया है। हालांकि, इसमें भागीदारी स्वैच्छिक होगी और किसी को भी इसमें शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।

अगस्त 2020 में, पुलिकेयसागर के कांग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन द्वारा कथित रूप से सोशल मीडिया पर एक “अपमानजनक” संदेश पोस्ट करने के बाद बेंगलुरु के कुछ हिस्सों में दंगे भड़क उठे थे। इस दौरान दो पुलिस स्टेशनों पर हमले हुएवाहनों को जलाया गया और 60 से अधिक पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ।

भीड़ ने विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर भी हमला किया और आग लगा दी। उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस द्वारा गोलियां चलाने पर चार लोग भी मारे गए। मामले की जांच के दौरान केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने बेंगलुरु के पूर्व मेयर और कांग्रेस नेता आर संपत राज को गिरफ्तार किया। साथ ही एक अन्य पूर्व नगरसेवक अब्दुल रकीब जाकिर को भी हिरासत में ले लिया।

इस बीच, भारत बंद के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए, भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे ने कहा कि बंद का आह्वान “बहुत निंदनीय” है और “सरकार को दंगाइयों और उनके हमदर्दों के खिलाफ” कार्रवाई करनी चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता एस प्रकाश ने कहा कि भारत बंद का आह्वान “सांप्रदायिक आधार” पर किया गया।

प्रकाश ने कहा, “समाज में अपील या शांति और सौहार्द को बनाए रखने और इन उदाहरणों को दोहराने की बजाय, वे उन दंगाइयों के साथ खड़े होना चाहते हैं, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया है।”