sadiya

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देश के पढ़े-लिखे मुसलमानों के भविष्य को बर्बाद कर उन्हें बदनाम करने में दक्षिणपंथी मीडिया और प्रेस कोई कसर नहीं छोड़ रही है. किसी भी मुस्लिम से पुलिस की पूछताछ हो जाना, आज उसके आतंकी होने के लिए काफी है. चाहे उसके खिलाफ कोई सबूत न हो.

ऐसा ही पुणे की सादिया शेख के साथ हुआ. जिसको गणतंत्र दिवस के पहले न केवल आतंकी बताकर प्रचारित किया गया. बल्कि उसके माथे पर फिदायीन यानि आत्मघाती हमलावर का लेबल भी लगा दिया गया. वह भी बिना किसी जांच और सबूत के. नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन कराने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंची सादिया से गलत इनपुट के चलते पुलिस ने पूछताछ की थी. लेकिन मीडिया ने उसे बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. ऐसे में अब सादिया ने प्रेस कांफ्रेस कर कई खुलासे किए.

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सादिया ने बताया कि वो नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन कराने के लिए जम्मू-कश्मीर गई थीं. वह बताती हैं कि जब मैं जम्मू कश्मीर गई तो वहां एक रिपोर्ट चल रही थी कि पुणे की एक लड़की है जो फिदायीन हमले में शामिल हो सकती है. इस रिपोर्ट के बाद पुणे पुलिस ने मेरे परिवार वालों से संपर्क किया और कहा कि या तो मैं पुणे वापस आ जाऊं या फिर वीडियो कॉल के द्वारा पुलिस से बात करूं. लेकिन जैसा की आप जानते हैं कि जम्मू कश्मीर में 26 जनवरी के आसपास इंटरनेट सर्विस बंद कर दी जाती है वहां सारी सर्विस बंद थी. मैं पुलिसे से बात नहीं कर पाई. मैंने कॉलेज के प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की जहां मैं एडमिशन लेना चाहती थी. लेकिन मेरा संपर्क उनसे भी नहीं हो सका. फिर मुझे समझ नहीं आया कि क्या करना है. मैं टैक्सी लेकर श्रीनगर चल दी, रास्ते में अवंतीपोरा चेकपोस्ट पर मुझे रोका गया और मुझसे कुछ सवाल पूछा गया.

सादिया ने बताया कि मैंने पूछताछ के दौरान पुलिस वालों को अपना परिचय दिया कि मैं सादिया हूं और पुणे की रहने वाली हूं. उन्होंने मेरी और मेरे बैग को चेक किया. जब उन्हें मेरे बैग में कुछ नहीं मिला तो वो लोग मुझे पुलिस स्टेशन ले गए. उन्होंने मेरा मोबाइल फोन भी ले लिया और मुझसे फोन को खोलने के लिए पासवर्ड भी पूछा और जांच शुरू कर दी. फिर मुझे महिला पुलिस स्टेशन ले गए जहां कई एजेंसी के लोग आए और मुझसे पूछताछ की. मैंने उन्हें अपने एडमिशन की बात बताई. लेकिन जब उन्हें कुछ नहीं मिला तब उन्होंने मुझे छोड़ दिया और जाने दिया.

बात चीत के दौरान सादिया ने कहा कि पिछले दिनों मेरे साथ जो भी कुछ हुआ है मैं उसे याद नहीं करना चाहती बल्कि मैं बस पढ़ना चाहती हूं.

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