नई दिल्ली | महाराष्ट्र के एक पुलिस कांस्टेबल ने सुप्रीम कोर्ट के उस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया है जिसमे उन्होंने कहा था की अगर कांस्टेबल केवल रमजान के दिनों में दाढ़ी रखने के लिए राजी हो जाये तो उसे नौकरी पर वापिस बुलाया जा सकता है. कांस्टेबल द्वारा सुप्रीम कोर्ट का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद , उसे नौकरी वापिस पाने के लिए कुछ और दिन इन्तजार करना पड़ेगा.

दरअसल महाराष्ट्र राज्य के निवासी जहिरुद्दीन शम्सुद्दीन बेदादे 16 जनवरी 2008 में महाराष्ट्र स्टेट रिज़र्व पुलिस बल में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे. फरवरी 2012 में शम्सुद्दीन ने अपने कमांडेंट से दाढ़ी रखने की इजाजत मांगी तो उनके कमांडेंट ने उन्हें इसकी इजाजत दे दी. लेकिन छह महीने बाद ही इस आदेश को वापिस ले लिया गया और शम्सुद्दीन को दाढ़ी नही रखने का फरमान सुना दिया गया.

इसके पीछे महाराष्ट्र गृह विभाग ने रिज़र्व पुलिस फाॅर्स के नियमो का तर्क दिया. गृह विभाग के आदेश के खिलाफ शम्सुद्दीन ने बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच में अपील की. हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए गृह विभाग ने कहा की सरकार केवल धार्मिक दिनों में शमसुद्दीन को दाढ़ी रखने की इजाजत दे सकती है. गृह विभाग के तर्कों के आधार पर हाई कोर्ट ने शम्सुद्दीन की याचिका को ख़ारिज कर दिया.

शम्सुद्दीन ने जनवरी 2013 में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. शम्सुद्दीन के वकील ने गुरुवार को चीफ जस्टिस जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने गुहार लगायी की इस याचिका पर जल्द सुनवाई की जाये. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा की जो भी आपके साथ हुआ उसका हमें इस बात का खेद है. अगर आप रोजे के दिनों में दाढ़ी रखने के लिए तैयार है तो आपको वापिस बुला लिया जायेगा. लेकिन शम्सुद्दीन के वकील ने कहा की वो इसके लिए तैयार नही है. इस पर कोर्ट ने कहा की फिर हम इस मामले में उनकी कोई मदद नही कर पाएंगे.

Loading...

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें