आठ प्रतिशत मुस्लिम मतदाता वाले राजस्थान में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सिर्फ एक मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में है। प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में से चुरु लोकसभा सीट से खड़े कांग्रेस के उम्मीदवार रफ़ीक मंडेलिया खड़े हुए है।

इतना ही नहीं रफ़ीक मंडेलिया उत्तर भारत के 7 प्रमुख राज्यों की कुल 91 लोकसभा सीटों पर किसी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी द्वारा खड़े किए गए अकेले मुस्लिम प्रत्याशी हैं। दरअसल, देश की दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों ने मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे 7 महत्वपूर्ण उत्तर-भारतीय राज्यों की 91 लोकसभा सीटों पर किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया।

बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव में चुरु सीट से ही कांग्रेस के टिकट पर खड़े हुए मंडेलिया मात्र 1850 वोटों से हार गए थे।

बीते 16 लोकसभा चुनावों के दौरान 25 लोकसभा सीटों वाले राजस्थान ने मात्र एक मुस्लिम प्रत्याशी तो चुनकर संसद भेजा है। मुस्लिम समुदाय से राजस्थान में अब तक के लोकसभा के चुनावी इतिहास में मात्र एक उम्मीदवार झुंझुनू से कैप्टन अयूब खान लोकसभा चुनाव जीत पाए हैं।

कैप्टन अयूब खान झुंझुनू से कांग्रेस के टिकट पर चार बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। वे 1984 और 1991 में लोकसभा का चुनाव जीतने में सफल रहे, जबकि 1989 और 1996 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वे 1995-1996 में पीवी नरसिम्हाराव की सरकार में कृषि राज्यमंत्री भी रहे थे। इससे पहले राजस्थान में कांग्रेस ने वर्ष 1951 में जोधपुर लोकसभा सीट से नूरी मोहम्मद यासीन को टिकट दिया था जो निर्दलीय हनुवंत सिंह से एक लाख एक हजार 816 मतों से हार गए थे। उस चुनाव में नूरी मोहम्मद को मात्र 38 हजार 17 मत मिले थे, जबकि हनुवंत सिंह को एक लाख 39 हजार 833 मत मिले थे।

वर्ष 1952 में सांसद हनुवंत सिंह का आकस्मिक निधन होने पर हुए उपचुनाव में काफी कम मतदान हुआ और उसमें कांग्रेस ने फिर से नूरी मोहम्मद यासीन को टिकट दिया। इस बार निर्दलीय जसवंत राज ने यासीन को 38 हजार 344 मतों से हराया।

कांग्रेस ने वर्ष 1957 के लोकसभा चुनाव में जयपुर से सादिक अली को मैदान में उतारा था। वे निर्दलीय हरीशचन्द्र शर्मा से चार हजार 504 मतों से हार गए थे। इसके बाद बीस साल बाद कांग्रेस ने 1977 के लोकसभा चुनाव में नवगठित लोकसभा क्षेत्र चूरू से बीकानेर के निवासी मोहम्मद उस्मान आरिफ को टिकट दिया था, लेकिन कांग्रेस शासन में लगे आपातकाल के विरोध में चल रही देशव्यापी जनता पार्टी की लहर में वे जनता पार्टी के प्रत्याशी दौलतराम सारण से एक लाख 51 हजार 891 मतों से हार गए थे।

कांग्रेस ने वर्ष 1996 में भरतपुर से चौधरी तैयब हुसैन को टिकट दिया जो भाजपा की महारानी दिव्या सिंह से 90 हजार 720 मतों से हार गए। इसके बाद वर्ष 1998 में कांग्रेस ने जयपुर से एम सईद खान गुडऐज को प्रत्याशी बनाया, लेकिन वह भाजपा के गिरधारीलाल भार्गव से एक लाख 38 हजार 971 मतों से हार गए। एक बार फिर कांग्रेस ने 1999 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशी पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. अबरार अहमद को झालावाड़ से मैदान में उतारा जो भाजपा की वसुंधरा राजे से एक लाख 32 हजार 405 मतों से हार गए।

कांग्रेस ने वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में अजमेर सीट से हबीबुर्र रहमान को टिकट दिया जो भाजपा के रासासिंह रावत से एक लाख 27 हजार 576 मतों से हारे। कांग्रेस ने फिर से 2009 में चूरू से रफीक मंडेलिया को टिकट दिया उन्होंने भाजपा के रामसिंह कस्वां को कड़ी टक्कर दी और मात्र 12 हजार 440 मतों के अंतर से हारे। इसके बाद पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राजस्थान में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया।

इस बार कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में फिर से चूरू से रफीक मंडेलिया को ही प्रत्याशी बनाया है, जिनका मुकाबला भाजपा के मौजूदा सांसद राहुल कस्वां से है। इससे पहले रफीक मंडेलिया राहुल कस्वां के पिता से वर्ष 2009 के चुनाव में हार चुके हैं। इस तरह देखें तो कांग्रेस ने 19962, 1967, 1972, 1980 और 2014 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान में एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था।

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