अयोध्या विवाद को लेकर मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में हिंदू संगठनों की बयानबाजी पर ऐतराज जताया है.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों ने दलील दी कि मामला अदालत में लंबित है, लेकिन हिंदू संगठनों की ओर से बयानबाजी की जा रही है. यह अवमानना जैसा है। . हमने खुद को अनुशासित कर रखा है. लेकिन हिंदू पक्ष की ओर से फैसले से पहले ही बयानबाजी हो रही है.

इस दौरान मुस्लिम पक्षकारों की ओर से राजीव धवन ने कहा कि मामले को संवैधानिक बेंच रेफर किया जाना चाहिए. उन्होंने इस्माइल फारुखी जजमेंट का हवाला दिया और कहा कि उस जजमेंट को ध्यान में रखकर ही हाई कोर्ट ने फैसला दिया है.

बता दें कि 1994 के जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है और नमाज कहीं भी पढ़ा जा सकता है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में अभी इस बात पर बहस हो रही है कि इस्माइल फारुखी के फैसले को संवैधानिक पीठ के समक्ष भेजा जाए या नहीं.

बता दें कि कल 17 मई को मामले की अगली सुनवाई होगी. इसमें हिंदू पक्षकारों की ओर से दलीलें पेश की जाएगी. इसके बाद मामले को संविधान पीठ को भेजे जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट अपना निर्णय सुरक्षित रखे जाने की संभावना है.


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