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नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी मुस्लिम स्टूडेंट संस्था ‘मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया’ MSOका नेशनल डेलीगेट्स कॉन्फ्रेंस दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चर सेंटर में आयोजित है. इस दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन चार सत्रों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. कॉन्फ्रेंस में कई अहम प्रस्तावों को भी पास किया गया.

कॉन्फ्रेंस के पहले सत्र की शुरूआत में एसोचैम यूपी के अध्यक्ष राकेश सिंह ने डेलीगेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि वक़्त की ज़रूरत है कि लोगों को उद्यमी बनना चाहिए. उन्होंने कहा कि कई सारे सेक्टर ऐसे हैं जिसमें मुस्लिमों की भागीदारी सबसे ज़्यादा है, जैसे- कालीन, अलीगढ़ का ताला उद्योग, मुरादाबाद का पीतल उद्योग, बनारसी साड़ी का कारोबार जैसे तमाम उद्योग हैं, लेकिन अनऑर्गनाइज़ हैं. ऐसे में इन्हें अपने उद्यमों और संस्थानों को ऑर्गनाइज़ तरीक़े से विकसित करना चाहिए.

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वहीं मुख्य वक्ता एएमयू के डॉक्टर अहमद मुज्तबा सिद्दीक़ी ने शिक्षा पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि क़ुरआन शरीफ़ की पहली आयत अल इक़रा आई थी यानी की पहली ही आयत में क़ुरआन शरीफ़ शिक्षा पर जोर दे रहा है. वक़्त की ज़रूरत है कि मुसलमानों को शिक्षा पर ज़्यादा ज़ोर देना चाहिए. एज़ुकेशन ही वह रास्ता है जो क़ामयाबी की तरफ ले जाता है. उन्होंने पैगंबर मोहम्मद (सल्ल.) की दी गई शिक्षाओं और तालीम पर चलने की बात कही.

कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता कर रहे मुफ्तीख़ालिद अय्यूबने कहा कि ईमान ही वह ताक़त है जो मुस्लिम को मजबूत बनाती है. ईमान ही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आखरत में कामयाब कराता है. जो भी ईमानवाला है वह जुर्म और ज्यादती के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करता है. रोहिंग्या के मुसलमानों पर हो रही जुर्म की हम सभी को मुख़ालिफ़त करनी चाहिए.

वहीं कॉन्फ्रेंस में कई सारे प्रस्तावों को भी पास किया गया. इसमें पहला प्रस्ताव अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और नई दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को बचाए रखने की मांग की गई. प्रस्ताव में कहा गया कि इन दोनों के अल्पसंख्यक दर्जे का सवालहज़ारों छात्रों के भविष्य जुड़ा है और अल्पसंख्यक दर्जे की वजह से 40 प्रतिशत मुस्लिम विद्यार्थियों को आसानी से दाख़िला मिल जाता है। ऐसे में इन संस्थाओं का दर्जा समाप्त किए जाने से मुस्लिम छात्रों के भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए सरकार को अल्पसंख्यक दर्जे कोबरकरार रखना चाहिए.

दूसरा प्रस्ताव दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नजीब अहमद पर चर्चा की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि सीबीआई जल्द से जल्द नजीब अहमद को बरामदगी करे. साथ ही सीबीआई ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर रही नजीब की मां नफीसा बेगम को पूरा समर्थन भी दिया. प्रस्ताव में कहा गया कि सीबीआई और दिल्ली पुलिस नजीब के मामले में लापरवाही बरत रही है. क्या वजह है कि पुलिस और सीबीआई मिलकर एक छात्र को एक साल से नहीं ढूंढ पाई है.

रोहिंग्या मुसलमानों के मसले पर एमएसओ डेलीगेट्स कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया गया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए एमएसओ के महासचिव शुजात अली क़ादरी ने कहा कि इस मामले पर मानवीय पहलू पर ग़ौर किया जाना चाहिए. शुजात ने कहा कि पीड़ित को ही शक़ की नज़र से देखना सही नहीं है, रोहिंग्या का मुस्लिम ऐसी मुसीबत में हैं जहां उसके साथ इंसानियत दिखाते हुए उनकी मदद करनी चाहिए.

वहीं फिलीस्तीन के मसले पर अजीम शाह ने कहा कि दुनिया के सभी मुल्कों को फ्री फिलीस्तीन  के लिए आवाज़ उठानी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से फिलीस्तीन के लिए आवाज़ उठाता रहा है. महात्मा गांधी से लेकर तमाम सरकारों ने फिलीस्तीन को अपना समर्थन दिया था. मौजूदा सरकार को भी फिलीस्तीन के मसले बिना संदेह समर्थन करना चाहिए.

कॉन्फ्रेंस में रविवार को संगठन के चुनाव किए जाएंगे और अन्य प्रस्तावों पर चर्चा होगी। कॉन्फ्रेंस के अंत में मुल्क में अमन, चैन और खुशहाली के लिए दुआ की गई।

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