Friday, January 28, 2022

एमएयू और जामिया के अल्पसंख्यक दर्जें को लेकर एमएसओं की मुस्लिमों से एकजुट होने की अपील

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अलीगढ मुस्लिम विश्विद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ ने  30 जुलाई को नई दिल्ली में बैठक की. इस बैठक में केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के उस फ़ैसले की आलोचना की गई जिसमें सरकार ने अदालत में चुनौती दी गई यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को नहीं बचाने का निर्णय किया है.

बैठक में कहा गया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और “अल्पसंख्यक संस्थान” के रूप में इसकी स्थिति लंबे समय से विवादास्पद मुद्दा रही है. भारतीय संविधान अनुच्छेद 30 (1) के अंतर्गत सभी धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों सहित शैक्षिक संस्थानों की स्थापना और उन्हें चलाने के अधिकार की गारंटी देता. इसके अलावा भारतीय कानून कहता हैं कि सरकार अल्पसंख्यक संस्थानों को दी जाने वाली मदद में किसी भी तरीके का भेदभाव नहीं करेगी. लेकिन एक वर्ग द्वारा हाल ही में एएमयू और जामिया मिलिया इस्लामिया के लिए सरकार द्वारा दिए गए इस आश्वासन पर सवाल उठाये गए हैं.

बैठक में मुख्य अथिति जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रोफेसर असद मलिक ने कहा कि “शिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और यह भी राज्य नीति का एक सिद्धांत है. उन्होंने आगे कहा शिक्षा हर समाज के लिए बेहद जरुरी हैं. आजादी के समय तत्कालीन सरकार ने अल्पसंख्यकों को उनके विकास की रक्षा के लिए एक आश्वस्त अधिकार दिया था. आजादी के दौरान सरकार को पिछड़े वर्गों के दयनीय हालात के बारे में अच्छी तरह से पता था जो अब भी आज के परिदृश्य में मौजूद है”

सैयद मोहम्मद कादरी ने कहा, “अल्पसंख्यकों भारतीय संविधान द्वारा प्रदत के अधिकारों, के प्रति समझौता नहीं करना चाहिए. सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए जो योजना बनाई है, भारत में मुसलमानों के उत्थान के लिए भी आवश्यकता है. भारत में मुसलमानों की 14-15% आबादी है. मुसलमान भी भारतीय नागरिक हैं और सरकार को उन्हें पिछड़ेपन से बाहर निकालने के लिए मदद करनी चाहिए”

अधिवक्ता शाहनवाज वारसी ने बैठक के अंत में कहा कि हमे सरकार से न्याय की मांग करना चाहिए और हमे अपने संवेधानिक अधिकारों के बारे में जागरूक रहना चाहिए साथ ही हमे मुस्लिम शेक्षणिक संस्थाओं के अस्तित्व के लिए एकजुट होना चाहिए.

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