एमएसओ ऑफ़ इंडिया ने किया सिविल सेवा परीक्षा में सफल परीक्षार्थियों का सम्मान

6:48 pm Published by:-Hindi News
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  • एमएसओ का सिविल सेवा परीक्षा में सफल परीक्षार्थियों का सम्मान
  • चयनित अभ्यर्थी फ़ुरक़ान अख़्तर ने मेहनत और भरोसे का बतया ज़रूरी

नई दिल्ली, 6 मई। भारत में मुसलमानों के लिए सभी अवसर खुले हुए हैं और सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का उसे लाभ उठाना चाहिए। इस संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफल परीक्षार्थियों में मुसलमानों की बढ़ती संख्या प्रसन्नता की बात है और इसे प्राप्त करने के लिए युवाओं को और प्रयास करना चाहिए। यह बात पूर्व पुलिस अधिकारी एवं लेखक शांतांनु मुखर्जी ने यहाँ आयोजित मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ के कार्यक्रम में कही। एमएसओ ने आईएएस की परीक्षा में सफल मुस्लिम अभ्यर्थियों के सम्मान में यह कार्यक्रम आयोजित किया था।

शांतांनु मुखर्जी ने मुख्य अतिथि की हैसीयत से कहाकि उन्हें इस बात की प्रसन्नता हो रही है कि मुस्लिम अभ्यर्थियों की भागीदारी नौकरशाही में ब़ढ़ रही है। उन्होंने अनुभव के आधार पर बताया कि यह महत्वपूर्ण है कि देश की सेवा के लिए नौकरशाह कानून और व्यावहारिकता के बल पर समाज की सेवा करें। मुखर्जी ने मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ एवं किसी भी मुस्लिम संगठन की ओर से सिविल सेवा के लिए मुफ़्त कॉचिंग देने की पेशकश की जिसका मौजूद लोगों ने भरपूर तालियों से स्वागत किया।

इस मौक़े पर संघ लोक सेवा आयोग की इस बार की परीक्षा में 444वीं रैंक पर सफल अभ्यर्थी फ़ुरक़ान अख़्तर ने अपनी सफलता के लिए सूफ़िज़्म एवं मेहनत को श्रेय दिया। उन्होंने कहाकि गांव और शहर की दूरी के आधार पर फैलाई जा रही किसी भी भ्रम से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहाकि जो भी इस परीक्षा की तैयारी कर रहा है उसे डिजिटल इंडिया की पहल का लाभ उठाते हुए सूचना तक अपनी पहुंच आसान बनानी चाहिए, अपनी जीवनशैली के आधार पर टाइम टेबल बनाना चाहिए और पूरी मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने इसे भ्रम बताया कि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास नहीं की जा सकती। अख़्तर ने कहाकि 9 घंटे नौकरी करने के बाद वह बाक़ी समय में पढ़ाई करते थे और तीसरी कोशिश के बाद एक नौकरशाह बने हैं।

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता एवं कम्पनी सचिव संस्थान के संस्थापकों में से एक एडवोकेट केएस भाटी ने कहाकि यदि आपको क़ानून की समझ नहीं है तो निश्चित ही आप अनपढ़ की श्रेणी में हैं क्योंकि किसी भी मेहनत और कार्य का विधिक रूप से निश्चिंत होना आवश्यक है। उन्होंने क़ानूनी सेवा में मुस्लिम विद्यार्थियों को आगे आने की अपील की और कहाकि विधिक शिक्षा के बल पर वह अपने समुदाय की तरक्की का मार्ग तेज़ी से प्रशस्त कर सकते हैं।

ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के संस्थापक अध्यक्ष मुफ्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि भारत का मुसलमान बहुत बड़ा राष्ट्रप्रेमी है. इसकी मिसाल यह है कि वह बंटवारे के बाद भी भारत में ही रुका। उन्होंने कहाकि 1971 के बाद भारत में मुस्लिम समाज ने अपने नज़रिये को बदला है और इसी के तहत उसकी तैयारियों का नतीजा है कि अब उसकी नौकरशाही और समाजसेवा में क़द बढ़ा है। मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ के प्रमुख शुजात अली क़ादरी ने कहाकि भारत में अब तक सिविल सेवा में मुसलमानों की भागीदारी 2 प्रतिशत से कम रही है लेकिन इस बार के इम्तहान में यह आंकड़ा 4 प्रतिशत से अधिक रहा है जो एक प्रगतिशील क़दम है। उन्होंने मुस्लिम युवाओं से इसी तरह मेहनत करने और देश की सेवा के लिए तत्पर रहने की अपील की।

इस अवसर पर मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ के सलाहकार अज़ीम शाह ने कहाकि इस्लाम की सिविल सेवा का कार्य सूफ़ी संतों ने किया है और किसी भी समुदाय में सेवा का बहुत महत्व है। यदि हमारे नौजवान चाहें तो मेहनत की प्रेरणा सूफ़ीवाद की शिक्षाओं में निहित है। मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ के पूर्व अध्यक्ष मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने युवाओं से अपील की कि वह तनाव प्रबंधन को नियमित करके किसी भी तरह की परीक्षा में कामयाब हो सकते हैं।

इस अवसर पर कॉर्पोरेट वकील कुमार अनिकेत, एंटरप्रीन्योर हर्ष पुष्करणा, समाजसेवी अकरम क़ादरी, मौलाना अब्दुल वाहिद, क़ारी सग़ीर अंसारी, रिसर्चर इमरान क़ुरैशी, मुशाहिद मलिक, ग़ुलाम रब्बानी, मुहम्मद ताज, नूर मुहम्मद समेत कई गणमान्य लोग एवं समाजसेवी उपस्थित थे।

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