Saturday, July 31, 2021

 

 

 

सीरियाई सरकार दें हजरत उमर की मज़ार की बेहूरमती करने वालों को फांसी: MSO

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जनाब बशार अलअसद साहब

सीरिया अरब गणराज्य के महान राष्ट्रपति

राष्ट्रपति भवनदमिश्कसीरिया

महोदय,

निवेदन है कि यह बहुत शोक का विषय है कि सीरिया के इदलिब शहर में उम्मैया ख़िलाफ़त के आठवें ख़लीफ़ा उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ की पार्थिव देह को सीरियाई सेना ने क़ब्र से खोद कर लापता कर दिया है। उनके मज़ार को तोड़ा गया है और दरगाह को आग लगा दी गई है।

राष्ट्रपतिजी आपके सीरियाई शासन के साथ लड़ने वाले मिलिशिया ने इस हफ्ते उत्तर-पश्चिम प्रांत इदलिब में स्थित आठवें उमय्यद खलीफा उमर इब्न अब्दुल अज़ीज़ की कब्र खोली, जला दी और गायब हो गए। उसके शव को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है। सोशल मीडिया पर विनाश की वीडियो फुटेज में देखा गया है कि खलीफा, उसकी पत्नी और उसके नौकर की कब्रों को खोदकर पवित्र देह निकाल ली गईं और उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ख़लीफ़ा उमर और उनके परिवार वालों की क़ब्रों को कहां ले जाया गया है और घटना के दोषी कौन हैं।

उमर इब्न अब्दुल अजीज पैगंबर मुहम्मद (सअव) और दूसरे खलीफा उमर इब्न अल-खत्ताब (रदि) के साथी के वंशज थे। मुस्लिम दुनिया में वह बहुत सम्मानित हैं, जिन्होंने अपने दो साल और पांच साल के छोटे शासनकाल में न्याय लागू किया। सुन्नी सूफ़ी समुदाय में उन्हें ख़लीफ़ा ए राशिद माना गया है।

उमैया राजवंश के बीच उनकी प्रतिष्ठा विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिन्हें कई लोगों ने बड़े पैमाने पर भ्रष्ट और पतनशील के रूप में देखा है, उन्हें “पांचवां सही-निर्देशित खलीफा” की उपाधि दी गई है। उमैया पहला मुस्लिम वंश था, जिसकी स्थापना 661 में दमिश्क में हुई थी।

फरवरी में, सुन्नी क्षेत्रों में दफन कई विपक्षी सेनानियों और कमांडरों की कब्रों पर तांडव करते हुए शासन बलों और मिलिशिया को दिखाते हुए वीडियो सामने आए, जिसमें अन्य वीडियो में सीरियाई सैनिकों को मानव खोपड़ी के साथ खेलते हुए दिखाया गया है। वर्ष 2015 में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए थे, जब शासन बलों ने हम्स में दर्जनों कब्रों को ढहा दिया था और लाशों को चुरा लिया था।

आपसे इस बाबत भारत के सूफी सुन्नी समुदाय के बहुसंख्यक मुसलमान यह कहना चाहते हैं कि दुर्दांत आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के विरुद्ध सीरिया के संघर्ष और सीरिया में हाफ़िज़ अल असद और आपके शासन के धर्म निरपेक्षता के सम्मान में हमेशा समुदाय ने आपको समर्थन दिया है। मगर इस तरह की घटनाओं से आपकी सरकार और उसकी छवि की गरिमा को बहुत क्षति पहुंची है।

इस बाबत हमारी मांग है कि

  1. तत्काल हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ की पवित्र देह और उनके परिवार वालों की देह को ढूंढ कर पुन: सम्मान के साथ उन्हीं क़ब्रों में दफ्न किया जाए जहाँ वह पहले से आराम कर रहे थे।
  2. जलाए गए मज़ार और क्षतिग्रस्त दरगाहों को पुन: उनके पारम्परिक स्वरूप में स्थापित किया जाए। इसके पुनर्निर्माण में तत्परता बरती जाए।
  3. दोषी सैनिकों और मिलिशिया की पहचान करके उन्हें सार्वजनिक फांसी की सज़ा दी जाए ताकि उनकी सोच के प्रति हमदर्दी रखने वाले विनाशकारी प्रवृत्ति के लोग यह समझ सकें कि इस्लाम के इतिहास और उसके पूर्वजों के प्रति दुराग्रह रखने का परिणाम क्या होता है।

हमें पूर्ण आशा है कि आप हमारी मांगों पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। भारत के बहुसंख्यक सूफ़ी सुन्नी समुदाय के लोगों के आपको दिए गए अगाध समर्थन और आतंकवाद के विरुद्ध सीरिया के संघर्ष को याद करते हुए हमें आपसे तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा है।

सादर।

शुजात अली क़ादरी

राष्ट्रीय अध्यक्ष

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इंडिया

पता: C 18, 1A ओखला विहार नई दिल्ली भारत 110025 (मोबाइल +91 9950 595 768)

दिनांक: 2 जून 2020

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