नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़े 1994 के इस्माइल फारूकी मामले को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि मस्जिद में नमाज़ का मुद्दा संविधान पीठ को नहीं भेजा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 2-1 की बहुमत से यह फ़ैसला दिया है।

कोर्ट ने कहा कि इस्माइल फारूकी केस से अयोध्या जमीन विवाद का मामला प्रभावित नहीं होगा। ये केस बिल्कुल अलग है। अब इस पर फैसला होने से अयोध्या केस में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट के फैसले के बाद अब 29 अक्टूबर 2018 से अयोध्या टाइटल सूट पर सुनवाई शुरू होगी।

कोर्ट ने कहा कि भारत की संस्कृति महान है। अशोक का शिलालेख है- हर धर्म महान है, शासन किसी एक धर्म को अलग से महत्व नहीं देता है। जस्टिस भूषण ने कहा कि हमें वह संदर्भ देखना होगा, जिसमें पांच सदस्यीय पीठ ने इस्माइल फारूकी मामले में 1994 में फैसला सुनाने का काम किया था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि देश को सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करना होगा।

हालांकि जस्टिस नज़ीर ने कहा कि मैं अपने साथी जजों की राय से सहमत नहीं हूं। जस्टिस नजीर ने कहा कि जो 2010 में इलाहाबाद कोर्ट का फैसला आया था, वह 1994 फैसले के प्रभाव में ही आया था। इसका मतलब इस मामले को बड़ी पीठ में ही जाना चाहिए था।

उल्लेखनीय है कि 1994 में इस्माइल फारूकी के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फैसला दिया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही राम जन्मभूमि में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया गया था, ताकि हिंदू धर्म के लोग वहां पूजा कर सकें। जिस पर मुस्लिम पक्षकारों ने दोबारा परीक्षण किए जाने की जरूरत बताई थी।

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