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नई दिल्ली: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी और भारत को अनेक महापुरुष दिए।’

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने तीन दिवसीय लेक्चर सीरीज ‘भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का दृष्टिकोण’ के आयोजन के मौके पर उन्होने कहा, कांग्रेस के रूप में देश की स्वतंत्रता के लिए सारे देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ, जिसके अनेक सर्वस्वत्यागी महापुरूषों की प्रेरणा आज भी लोगों के जीवन को प्रेरित करती है।

सरसंघचालक ने कहा कि 1857 के बाद देश को स्वतंत्र कराने के लिये अनेक प्रयास हुए, जिनको मुख्य रूप से चार धाराओं में रखा जाता है। कांग्रेस के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एक धारा का यह मानना था कि अपने देश में लोगों में राजनीतिक समझदारी कम है। सत्ता किसकी है, इसका महत्व क्या है, लोग कम जानते हैं और इसलिये लोगों को राजनीतिक रूप से जागृत करना चाहिए। भागवत ने कहा, ‘‘ और इसलिये कांग्रेस के रूप में बड़ा आंदोलन सारे देश में खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि इस धारा का स्वतंत्रता प्राप्ति में एक बड़ा योगदान रहा है।

उन्होने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में योजनाएं कम नहीं बनी, राजनीति के क्षेत्र में आरोप लगते रहते हैं, उसकी चर्चा नहीं करूंगा, लेकिन कुछ तो ईमानदारी से हुआ ही है। सरसंघचालक ने कहा कि देश का जीवन जैसे जैसे आगे बढ़ता है, तो राजनीति तो होगी ही और आज भी चल रही है। सारे देश की एक राजनीतिक धारा नहीं है। अनेक दल है, पार्टियां हैं। इसके विस्तार में जाए बिना उन्होंने कहा, ‘‘ अब उसकी स्थिति क्या है, मैं कुछ नहीं कहूंगा। आप देख ही रहे हैं।’’

भागवत ने कहा, ‘‘ हमारे देश में इतने सारे विचार हैं,लेकिन इन सारे विचारों का मूल भी एक है और प्रस्थान बिंदु भी एक है। विविधताओं से डरने की बात नहीं है, विविधताओं को स्वीकार करने और उसका उत्सव मनाने की जरूरत है।’’ उन्होंने कहा कि विविधता में एकता का विचार ही मूल बिंदु है और इसलिये अपनी-अपनी विविधता को बनाए रखें और दूसरे की विविधता को स्वीकार करें।

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