Friday, July 30, 2021

 

 

 

लॉकडाउन में याक़ूब ने अमित से निभाई आखिरी सांस तक दोस्ती

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कोरोना के प्रसार को रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए लगाया गया लॉकडाउन अब लोगों की मौ’त का सबब बन चुका है। लॉकडाउन के बीच हजारो की संख्या में प्रवासी मजदूर कोई साधन न होने के चलते पैदल ही अपनी मंजिल की और निकल रहे है। कुछ हादसों का शिकार हो रहे है तो कुछ मंजिल तक पहुँचने से पहले ही रास्ते में अपना दम तोड़ दे रहे है। लेकिन इन लोगों की मदद करने वाला कोई नई है।

मामला गुजरात से अपने घर के लिए निकले दो दोस्त अमित और याक़ूब का है। दोनों पैदल ही साथ निकले थे। लेकिन रास्ते मे ही अमित की तबीयत खराब हो गई। ऐसे में याक़ूब ने दोस्ती का फर्ज निभाते हुए अमित का साथ देना जारी रखा।आखिरी सांस तक वह अमित की सेवा करता रहा। लेकिन अंत में अमित ने दम तोड़ दिया। दोनों दोस्तो की एक तस्वीर सोशल  मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमे याक़ूब अपने बीमार दोस्त को अपने हाथों में लिए उसे हिम्मत दिला रहा।

वहीं दूसरी और अब गृह मंत्रालय ने एक बार फिर राज्यों को निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों का पैदल पलायन रोकें। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों से कहा है कि हमें मिल रही जानकारी के अनुसार प्रवासी मजदूर सड़कों और रेलवे की पटरियों पर अभी भी चल रहे हैं। ऐसे में सभी राज्यों को सलाह दी जाती है कि यदि वे ऐसी स्थिति में पाए जाते हैं, तो उन्हें पैदल घर वापसी के लिए रोका जाए और उनके लिए पास के आश्रय स्थलों में भोजन, पानी आदि की व्यवस्था की जाए।

मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए कि ऐसी स्थिति पर सभी प्रवासी मजदूरों को चलाई गईं विशेष बसों और श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से उनकी घर वापसी सुनिश्चित की जाए। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये सभी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की हैं। गृह मंत्रालय ने कहा है कि रेल मंत्रालय प्रति दिन 100 से अधिक श्रमिक विशेष ट्रेनें चला रहा है और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था करने के लिए भी तैयार है। इन व्यवस्थाओं के बारे में प्रवासी मजदूरों को जागरूक किया जाना चाहिए।

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