अमरोहा. भारतीय टीम के तेज गेंदबाद मोहम्मद शमी और उनकी पत्नी हसीन जहां के बीच चल रही अदालती लड़ाई में नया मोड आ गया है। हसीनजहां ने अब इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपना केस खुद लड़ने का फैसला किया है।

बता दें कि हसीन जहां ने अपने और अपनी मासूम बेटी संग क्रूर व अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन किसी वकील के न तैयार होने पर हसीन जहां ने खुद ही अपने लिए पैरवी करने का फैसला किया है। दरअसल, हसीन जहां के अधिवक्ता ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मुकदमा लड़ने से इनकार कर दिया है।

हसीन ने अपनी याचिका में कहा कि 28 अप्रैल 2019 को वह अपनी बेटी और मेड के साथ अमरोहा स्थित अपनी ससुराल आई थीं। शाम साढ़े आठ बजे एसएचओ देवेंद्र कुमार अन्य पुलिसकर्मियों के साथ घर आए और बात कर चले गए। रात 12 बजे दोबारा पुलिस घर पर आई। हसीन ने आरोप लगाया कि ये सब शमी के कहने पर हुआ था।

हसीन ने याचिका में आगे बताया कि आधी रात को पुलिस घर में घुसकर गाली-गलौज करने लगी और बेटी और मेड के साथ मुझे जबरन थाने ले गई और मेडिकल कराया। मुझे रातभर थाने में बिठाए रखा। पुलिस ने दूसरे दिन 29 अप्रैल 2019 को 9 बजे गिरफ्तार कर लिया। हसीनजहां का आरोप था कि पुलिस ने उन्हें गाउन में ही जबरन घर से उठा लिया।

आरोप है कि उन्हें रातभर भूखे-प्यासे बच्ची के साथ जिला अस्पताल के बंद कमरे में रखा गया। जहां पूरी रात बेटी व उन्हें मच्छर काटते रहे। जब उन्होंने पुलिसकर्मियों से बाहर निकालने की बात कही तो पुलिसकर्मियों ने अभद्रता की। हसीन जहां ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में ये आरोप लगाते हुए पुलिस के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने अमरोहा पुलिस को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। इस मामले में पुलिस ने भी कोर्ट में अपना पक्ष प्रस्तुत कर दिया है।

हसीनजहां का आरोप है कि शमी के दबाव में पुलिस और अधिवक्ता उनकी मदद नहीं कर रहे। उधर, मोहम्मद शमी के भाई हसीब ने कहा कि शमी ने न तो पुलिस पर कभी कोई दबाव बनाया और न ही किसी अधिवक्ता पर। कोर्ट में सुनवाई के बाद हकीकत सामने आ जाएगी।

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