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मुंबई: मोदी सरकार में मंत्री सत्यपाल सिंह ने मानव के क्रमिक विकास का चार्ल्स डार्विन का सिद्धांत ‘वैज्ञानिक रूप से ग़लत करार देते हुए इस को स्कूलों में पढ़ाए जाने पर रोक लगाने की बात कही है.

मानव संसाधन राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने किसी भी बंदर को आदमी में बदलते नहीं देखा. इसके बारे में नहीं लिखा. इसलिए डार्विन का ये सिद्धांत गलत है. उन्होंने कहा कि जब से इस धरती पर इंसान आया है, तब से वह मानव रूप में ही है. यानी इंसान मानव के रूप में ही इस धरती पर आया है.

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ऑल इंडिया वैदिक सम्मेलन में हिस्सा लेने आए केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘हमारे किसी भी पूर्वज ने लिखित या मौखिक रूप में कपि को इंसान में बदलने का जिक्र नहीं किया था.’ ध्यान रहे डार्विनवाद जैविक विकास से संबंधित सिद्धांत है. उन्नीसवीं सदी के अंग्रेज प्रकृतिवादी डार्विन और अन्य ने यह सिद्धांत दिया था.

महाराष्ट्र काडर में 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी सत्यपाल सिंह 2014 में ही चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं. उन्हें हालिया कैबिनेट विस्तार में मानव संसाधव विकास राज्यमंत्री बनाया गया है.

 सत्यपाल सिंह सांसद बनने ने पहले मुंबई पुलिस कमिश्नर थे और सेवा के दौरान वह इस पद से इस्तीफा देने वाले पहले अधिकारी थे.

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