नई दिल्ली | इजराइल और फिलिस्तीन के बीच जारी तनाव जगजाहिर है. दोनों देशो का रिश्ता भारत-पाकिस्तान के रिश्तो जैसा ही है इसलिए ज्यादातर देशो की सरकारे दोनों देशो में से किसी एक देश का पक्ष करना ज्यादा बेहतर समझते थे. लेकिन भारत इससे अलग रहा. पूर्वर्ती सरकारों ने दोनों ही देशो के साथ अपने सम्बन्ध बनाए रखे और उनके मामलो में तटस्थ रहना ज्यादा मुनासिब समझा.

लेकिन देश में मोदी सरकार बनने के बाद भारत की इजराइल के प्रति निति थोडा बदली है. भारत अब इजराइल के साथ अपने सम्बन्ध खुलकर जाहिर करना चाहता है. इसकी बानगी जुलाई को देखने को मिलेगी जब प्रधानमंत्री मोदी इजराइल का दौरा करेंगे लेकिन फिलिस्तीन से दूरी बनाकर रखेंगे. मोडिया का यह फैसला भारत की नई विदेश नीति को प्रदर्शित कर रहा है.

मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी इसी साल जुलाई के दूसरे हफ्ते में हैमबर्ग में जी20 समिट से लौटते समय इजराइल जायेंगे. भारत में इजराइल के राजदूत डेनियल कार्मन ने कहा की मोदी के इजराइल दौरे से दोनों देशो के बीच रिश्तो में गर्माहट आएगी. इसके अलावा कार्मन ने यह भी कहा की दोनों देशो को अपने रिश्तो को सार्वजनिक करने में कोई गुरेज नही है.

हालाँकि भारत फिलिस्तीन के साथ भी अपने रिश्ते खराब नही करना चाहता. इसलिए मोदी के इजराइल दौरे के समय फिलिस्तीन न जाने के फैसले का असर कम करने के लिए फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को भारत आने का निमंत्रण दिया गया है. भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अदनान अबू अलहायजा ने बताया की मोदी इजराइल दौरे के समय फिलिस्तीन नही जायेंगे लेकिन इंशा अल्लाह हमारे राष्ट्रपति इस साल यहाँ होंगे.


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