नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावो में बीजेपी की बम्पर जीत को मोदी लहर का परिणाम माना जा रहा है. बीजेपी नेताओं का मानना है की मोदी सरकार के ढाई साल के कामकाज के प्रति लोगो ने जनादेश दिया है. उनका मानना है की मोदी द्वारा लिए गए कुछ कठोर कदम भी इसके लिए जिम्मेदार है. मसलन नोट बंदी और सर्जिकल स्ट्राइक की वजह से भी बीजेपी को उत्तर प्रदेश में बड़ी जीत मिली है.

उत्तर प्रदेश की जीत को नोट बंदी पर जनादेश बताना हार्वर्ड के एक प्रोफेसर को रास नही आया. उनका मानना है की यूपी चुनाव में मोदी की जीत बिलकुल फ़िल्मी है. उन्होंने नोट बंदी के बाद सरकार द्वारा जारी जीडीपी के आंकड़ो पर भी सवाल उठाये. ज्ञात हो की मोदी ने यूपी चुनावो में इन्ही जीडीपी आंकड़ो का जिक्र करते हुए कहा था की यह हार्वर्ड का नही बल्कि हार्ड वर्क का नतीजा है.

दरअसल हार्वर्ड बिज़नस रिव्यु में प्रकाशित एक लेख में टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर भास्कर चक्रवर्ती ने लिखा है की नोट बंदी हुए चार महीने बीत चुके है. निश्चित तौर पर इस अन्तराल में देश के अन्दर काफी समस्याए पैदा हुई है. हम देखना चाहेंगे की सरकार के इस फैसले का भ्रष्टाचार पर क्या असर हुआ है? हालाँकि विधानसभा चुनावो के परिणाम को नोट बंदी के फैसले का परिणाम माना जा रहा है लेकिन यह पूरी तरह से फ़िल्मी लगता है.

चक्रवर्ती ने आगे लिखा की ऐसा अप्रत्याशित केवल बॉलीवुड की फिल्मो में होता है. चक्रवर्ती ने सरकार द्वारा जारी जीडीपी आंकड़ो को भी मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा की नोट बंदी से जीडीपी में ग्रोथ दर्ज होने वाले सरकारी आंकड़े गलत है. हालाँकि चक्रवर्ती ने नोट बंदी का फायदा बताते हुए कहा की इससे भारत में डिजिटल ट्रांसेक्सन की और भारतीयों का रुख बढ़ा है. मालूम हो की चक्रवर्ती ने दिसम्बर में भी नोट बंदी के खिलाफ ‘कैश पर भारत में चिंता’ नामक लेख लिखा था.

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