Narendra Modi, India's prime minister, speaks during the 37th Singapore Lecture held at the Shangri-La Hotel in Singapore, on Monday, Nov. 23, 2015. Modi's government, which in February pushed back its deadline for fiscal consolidation by a year to March 2018, faces a higher wage bill just as a sluggish economy and dwindling asset sales are weighing on revenue. Photographer: Nicky Loh/Bloomberg via Getty Images

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केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘तीन तलाक’ के विरोधमें हलफनामा दाखिल करने के बाद शुरू हुई इस बहस में आखिरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हो गये हैं. पहली बार इस मुद्दें पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि तीन तलाक के मुद्दे पर देश की कुछ पार्टियां वोट बैंक की भूख में 21वीं सदी में मुस्लिम औरतों से अन्याय करने पर तुली हैं. क्या मुसलमान बहनों को समानता का अधिकार नहीं मिलना चाहिये.

उन्होंने कहा ‘‘मेरी मुसलमान बहनों का क्या गुनाह है. कोई ऐसे ही फोन पर तीन तलाक दे दे और उसकी जिंदगी तबाह हो जाए. क्या मुसलमान बहनों को समानता का अधिकार मिलना चाहिये या नहीं. कुछ मुस्लिम बहनों ने अदालत में अपने हक की लड़ाई लड़ी. उच्चतम न्यायालय ने हमारा रुख पूछा. हमने कहा कि माताओं और बहनों पर अन्याय नहीं होना चाहिये. सम्प्रदायिक आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिये.’’

पीएम ने आगे कहा, ‘‘चुनाव और राजनीति अपनी जगह पर होती है लेकिन हिन्दुस्तान की मुसलमान औरतों को उनका हक दिलाना संविधान के तहत हमारी जिम्मेदारी होती है. मैं मीडिया से अनुरोध करना चाहता हूं कि तीन तलाक को लेकर जारी विवाद को मेहरबानी करके सरकार और विपक्ष का मुद्दा न बनाएं. भाजपा और अन्य दलों का मुद्दा ना बनाएं, हिन्दू और मुसलमान का मुद्दा ना बनाएं. जो कुरान को जानते हैं, वे टीवी पर आकर चर्चा करें.’’

उन्होंने आगे कहा ‘‘मुसलमानों में भी लोग सुधार चाहते हैं. जो सुधार नहीं चाहते, उनकी चर्चा हो।. सरकार ने अपनी बात रख दी है. कोई गर्भ में बच्ची की हत्या कर दे तो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिये. वैसे ही तीन तलाक कहकर औरतों की जिंदगी बर्बाद करने वालों को यूं ही नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.’’


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