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चित्रकोट | नोट बंदी के फैसले के बाद देश में कैश को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. पिछले 45 दिनों में बैंकों और एटीएम के सामने लगी कतारे छोटी होने का नाम नही ले रही है. मोदी सरकार ने कतारों को छोटी करने के लिए न जाने कितने नियम बदले. पिछले 45 दिनों में करीब 60 बार नियम बदले जा चुके है. लेकिन सरकार की सारी कोशिशे नाकाम हो गयी. हालात इस कदर ख़राब है की बैंकों के पास अभी भी कैश नही पहुँच रहा है.

कैश की किल्लत की वजह से किसान समय पर बुआई नही कर पा रहे, मजदूरों को मजदूरी नही मिल पा रही, उधोग धंधे बंद होने लगे, करोडो लोग बेरोजगार होकर अपने घर लौट गए और न जाने कितनी समस्याए लोगो को झेलनी पड़ रही है. सबसे दुखद यह रहा की एटीएम और बैंकों की लाइन में घंटो लगने की वजह से करीब 100 लोग दम तोड़ चुके है. इसके बावजूद मोदी सरकार की तरफ से इन लोगो के लिए कभी भी संवेदना के शब्द सुनाई नही दिए.

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक वकील ने , नोट बंदी की वजह से हो रही मौतों के लिए पीएम मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को जिम्मेदार ठहराते हुए इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की माग की है. न्यूज़ 18 की खबर के अनुसार एक वकील श्री मिश्रा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका डाल इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की.

मिश्रा ने अपनी याचिका में बताया की मऊ में निषाद नामक एक व्यक्ति बैंक की लाइन में पैसा निकालने के लिए खड़ा था. काफी देर तक लाइन में लगे होने की वजह से निषाद की हार्टअटैक से मौत हो गयी. इसके लिए पीएम मोदी, अरुण जेटली और उर्जित पटेल जिम्मेदार है. मैं मांग करता हूँ की इन सबके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा. अदालत इस मामले में 3 जनवरी को सुनवाई करेगी.

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