नई दिल्ली | खादी ग्रामोधोग का हर साल छपने वाला कैलेंडर इस बार थोडा अलग है. इस साल के कैलेंडर में खादी ग्रामोधोग की आत्मा कहे जाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की तस्वीर नही है. यह सुनकर जैसे आपको धक्का लगा वैसे ही खादी ग्रामोधोग के अफसर और कर्मचारी भी सकते में है. कुछ कर्मचारी इस बात से बेहद नाराज दिखे की खादी ग्रामोधोग जैसे संस्थाओ में भी अब राजनीती हावी होने लगी.

दरसल खादी ग्रामोधोग हर साल अपना एक कैलेंडर और डायरी जारी करता है. इस बार के कैलेंडर में गाधी जी की जगह प्रधानमंत्री मोदी ने ले ली है. हर साल जारी होने वाले कैलेंडर में गाँधी जी की तस्वीर होती थी. इस साल गांधी जी की तस्वीर की जगह मोदी की तस्वीर कैलेंडर में लगाई गयी है. इस तस्वीर में मोदी चरखा फेरते हुए दिख रहे है.

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पहले जारी कैलेंडर में भी गाँधी जी चरखा फेरते दिखाई देते थे. खादी ग्रामोधोग के चेयरमैन विनय सक्सेना से जब इस बारे में पुछा गया तो उन्होंने कहा की इसमें हैरानी वाली कोई बात नही है. इससे पहले भी ऐसा कैलेंडर में किसी और की तस्वीर छपी है. पूरा खादी उधोग ही गाँधी जी के दर्शन और विचारो पर आधारित है. वो इस उधोग की आत्मा जैसे है. ऐसे में गाँधी जी को नजरंदाज करने का सवाल ही पैदा नही होता.

विनय सक्सेना ने आगे कहा की मोदी जी की वजह से खादी उधोग को नयी उर्जा मिली है. वो खुद खादी पहनते है और देश-विदेश में लोगो को खादी पहनने के लिए प्रेरित करते है. मोदी जी से बड़ा खादी ग्रामोधोग का ब्रांड एम्बेसेडर और कोई नही हो सकता. उनके मेक इन इंडिया विजन के तहत ही खादी ग्रामोधोग गाँव में लोगो को आत्मनिर्भर बनाने और स्किल डेवलपमेंट के जरिये उनको रोजगार देने का प्रयास कर रहा

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