कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूर्व की संप्रग सरकार के दौरान पारित किये गए लोकपाल विधेयक को कमजोर करने का आरोप लगाया है.

मध्य प्रदेश के खजुराहो में शनिवार से शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय जल सम्मेलन में हिस्सा लेने आए अन्ना हजारे ने कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अबतक कुल 32 पत्र लिखे हैं, जिनमें 10 लोकपाल कानून और शेष किसानों व जमीन संबंधी समस्याओं को लेकर हैं. लगातार पत्र लिखने के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से जवाब नहीं आया.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

अन्ना ने बताया, “कांग्रेस सरकार को कुल 70 पत्र लिखे थे और 2011 में रामलीला मैदान में आंदोलन करने पर सरकार ने लोकपाल विधेयक पारित कर दिया था. मगर उस कानून में कमी रह गई थी. वर्तमान सरकार ने तो उसे और कमजोर कर दिया है. इसीलिए 23 मार्च से आंदोलन शुरू कर रहे हैं. यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक लोकपाल कानून को मजबूत नहीं किया जाता और किसानों का कर्ज माफ नहीं हो जाता. आंदोलन पूरी तरह अहिंसक होगा, सरकार जेल भेजेंगी तो जेल आना-जाना लगा रहेगा.”

अन्ना ने मोदी सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “लोकसभा में एक दिन में संशोधन विधेयक बिना चर्चा के पारित हो गया, फिर उसे राज्यसभा में 28 जुलाई को पेश किया गया. उसके बाद 29 जुलाई को उसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया, जहां से हस्ताक्षर हो गया. जो कानून पांच साल में नहीं बन पाया, उसे तीन दिन में कमजोर कर दिया गया.”

अन्ना ने आरोप लगाया, “मनमोहन सिंह और मोदी, दोनों के दिल में देश सेवा और समाज हित की बात नहीं है. वे उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे, लेकिन किसानों की चिंता उन्हें नहीं है.”  उन्होंने उद्योगपतियों का कर्ज माफ किए जाने पर सवाल उठाया और कहा, ‘‘उद्योगपतियों का हजारों करोड़ रुपये कर्ज माफ कर दिया गया है, मगर किसानों का कर्ज माफ करने के लिए सरकार तैयार नहीं है. किसानों का कर्ज मुश्किल से 60-70 हजार करोड़ रुपये होगा. क्या सरकार इसे माफ नहीं कर सकती है.’’

Loading...