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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी के नोट बंदी के फैसले को हर कोई सराह रहा है. लेकिन इससे उत्पन हो रही परेशानी के लिए भी लोग प्रधानमंत्री मोदी को ही जिम्मेदार ठहरा रहे है. पिछले एक महीने से बैंकों और एटीएम की लाइन में खड़े लोग यह कहते सुनाई दिए की फैसला सही है लेकिन इसको लागू करने में सरकार फेल रही है. लेकिन कुछ लोगो को यह भी गंवारा नही की बेइन्तजामी पर भी मोदी को जिम्मेदार न ठहराया जाए.

इसके कई उदहारण देखने को मिले है. एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार ने जब एटीएम और बैंकों की लाइन में लगे लोगो से उनकी परेशानी जाननी चाही तो उनको काफी विरोध का सामना करना पड़ा. कुछ देर बाद ही वहां कई लोग इकठ्ठा हुए और रविश कुमार को मोदी विरोधी करार देने लगे. उन्होंने मोदी मोदी नारे लगाने शुरू कर दिए. ऐसा उनके साथ दो बार हुआ.

आजतक के वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून जोशी को भी इसी तरह के विरोध का सामना करना पड़ा. बीजेपी पर यह आरोप लग रहा है की उन्होंने हर एटीएम और बैंक के सामने लगी लाइन में अपने कुछ लोग छोड़े हुए है. जो मोदी की तारीफे करने के लिए लाइन में लगाए गए है. अगर कोई शख्स मोदी की बुराई करता है तो ये लोग उनको धमकाते है और जरुरत पड़ने पर पिटाई भी कर देते है.

दक्षिणी दिल्ली से एक ऐसा ही वाकया सामने आया है. यहाँ एक पेंटर को सिर्फ इसलिए मार खानी पड़ी क्योकि उसने एटीएम और बैंकों में लगी लम्बी लाइनों के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहराया. पेंटर लल्लन ने आशिक नाम के व्यक्ति पर आरोप लगाया की उसने मेरी क्रिकेट के स्टाम्प से पिटाई की. लल्लन ने बताया की मैं एक एटीएम की लाइन में जाकर खड़ा हुआ तो मैंने लम्बी लाइनों के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहराया. इस पर आशिक ने पहले मुझे अपशब्द कहे और फिर क्रिकेट के स्टाम्प से पिटाई की.


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