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कैराना उपचुनाव में मिली करारी हार से सबक लेते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने उत्तर भारत की इस चीनी पट्टी (शुगर बेल्ट) के बड़े सेंटर के गन्ना किसानों को 8000 करोड़ का पैकेज दे की तैयारी कर ली है.

बता दें कि देश भर के गन्ना किसानों का 22 हजार करोड़ से ज्यादा रुपया चीनी मिलों पर बकाया है. इसमें आधे से ज्यादा बकाया रकम यूपी के गन्ना किसानों की है. कल इस संबंध में आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडली समिति (सीसीईए) की बैठक में कोई निर्णय लेने की संभावना है.

खाद्य मंत्रालय ने 30 लाख टन चीनी के बफर स्टॉक बनाने का प्रस्ताव दिया है. साथ ही पैकेज में 30 लाख टन का गन्ने का बफर स्टॉक होगा, जिसके लिए किसानों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर होंगे। ध्यान चीनी मिलें गन्ना उत्पादक का भुगतान करने में असमर्थ हैं क्योंकि चीनी उत्पादन वर्ष 2017-18 (अक्टूबर – सितंबर) में अब तक 3.16 करोड़ टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद चीनी मूल्यों में तेजी से गिरावट आने से उनका वित्त हालत कमजोर बनी हुई है.

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माना जा रहा है कि सरकार का यह कदम 2019 के आम चुनावों में किसानों को आकर्षित करने के उद्देश्य से लिया गया है. इसके अलावा सरकार ने चीनी की न्यूनतम कीमत 29 रुपये प्रति किलोग्राम तय कर दी है जिससे गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान किया जा सके.

पिछले महीने सरकार ने गन्ना किसानों के लिए 1500 करोड़ रुपये की उत्पादन से संबद्ध सब्सिडी की घोषणा की थी ताकि गन्ना बकाये के भुगतान के लिए चीनी मिलों की मदद की जा सके.

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