रोजगार के मुद्दे पर आलोचना झेल रही केंद्र की मोदी सरकार ने अब माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनरी एजेंसी (Mudra) योजना के तहत नौकरियों से जुड़े डाटा को जारी नहीं करने का फैसला किया है। लेबर ब्यूरो के सर्वे के आंकड़े को 2 महीने के लिए टाल दिया गया है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ‘मुद्रा स्कीम के तहत पैदा की गईं नौकरियों की संख्या से जुड़े आंकड़े चुनाव बाद सार्वजनिक किए जाएंगे। एक्सपर्ट कमेटी ने पाया कि निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए ब्यूरो की ओर से इस्तेमाल की गई पद्धति में अनियमितताएं हैं।’

बता दें कि एनडीए सरकार ने अभी तक एनएसएसओ की बेरोजगारी पर जबकि लेबर ब्यूरो की नौकरियों और बेरोजगारी से जुड़ी छठवीं सालाना रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की है। इन दोनों ही रिपोर्ट में एनडीए के शासनकाल में नौकरियों में गिरावट आने की बात सामने आई थी। नौकरियों और बेरोजगारी से जुड़ी लेबर ब्यूरो की छठवीं सालाना रिपोर्ट में बताया गया था कि 2016-17 में बेरोजगारी चार साल के सर्वोच्च स्तर 3.9 पर्सेंट पर थी।

वहीं, एनएसएसओ की रिपोर्ट में कहा गया था कि बेरोजगारी 2017-18 में 45 साल के सर्वोच्च स्तर 6.1 पर्सेंट पर थी। नीति आयोग ने पिछले महीने लेबर ब्यूरो से कहा था कि वे सर्वे को पूरा करके अपने निष्कर्ष 27 फरवरी को पेश करें ताकि उन्हें आम चुनाव से पहले घोषित किया जा सके।

सूत्रों का कहना है कि सोमवार से चुनावी आचार संहिता लागू होने के बाद अनौपचारिक तौर पर यही फैसला हुआ है कि इस रिपोर्ट को चुनाव के दौरान सार्वजनिक न किया जाए।

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