एमबीबीएस तथा बीडीएस में दाखिले के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में उर्दू को शामिल किये जाने की याचिका पर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि इस साल उर्दू को नीट में शामिल नहीं किया जा सकता. हालांकि केंद्र की और से अगले साल से उर्दू को शामिल करने पर विचार करने की बात कही गई हैं.

न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ तथा न्यायमूर्ति आर. भानुमति की पीठ को केंद्र सरकार ने बताया कि वह इस साल उर्दू शामिल नहीं कर सकती, पर शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए इस पर विचार करेगी. दरअसल, जमात-ए-इस्लामी हिन्द की छात्र शाखा स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने याचिका दाखिल कर कहा है कि नीट की एक भाषा के तौर पर उर्दू को हटाया जाना ‘भेदभावपूर्ण, मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 21 का उल्लंघन है.

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने ताया कि इससे पहले इस संबंध में किसी भी राज्य ने कोई अनुरोध नहीं किया. हालांकि महराष्ट्र और तेलंगाना ने अब केंद्र सरकार से आधिकारिक तौर पर अनुरोध किया है कि नीट की एक भाषा के तौर पर उर्दू को भी शामिल किया जाए. याचिकाकर्ता ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और सीबीएसई को परीक्षा उर्दू में भी कराने का प्रावधान करने का निर्देश देने की अपील की है.

याचिकाकार्ता ने कहा है, भारत में छठी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा उर्दू को हटाना और सातवीं सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा गुजराती तथा 12वीं सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा असमी को शामिल किया जाना पूरी तरह अतार्किक है. नीट 2017 का अयोजन सात मई को होना है. इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि भी समाप्त हो चुकी है.

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