ट्रिपल तलाक को आपराधिक घोषित करने वाले मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 (The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) को शीतकालीन में पास कराने में नाकाम रही केंद्र की मोदी सरकार ने कहा कि इस सबंध में उसकी अध्यादेश लाने की मंशा नहीं है.

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि फिलहाल सरकार का ऐसा कोई विचार नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि विधेयकों पर संसद में विचार किया जाए, बहस और उसे पारित किया जाए. ध्यान रहे शीतकालीन सत्र में यह बिल लोकसभा में पास हो गया था. जबकि इस राज्यसभा से मंजूरी नहीं मिली थी.

इस विधेयक पर राजनीतिक दलों के रुख पर हुए सवालों के जवाब में नकवी ने कहा कि बीजेपी के लिए विकास का मसौदा, वोट का सौदा नहीं है. हमें उम्मीद है कि बजट सत्र में तीन तलाक बिल को भी संसद की मंजूरी मिल जाएगी.

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बता दें कि इस बिल पर मोदी सरकार को विपक्ष के साथ-साथ अपने सहयोगियों का भी साथ नहीं मिल रहा है. इस बिल को लेकर दो सहयोगी दल – शिवसेना तथा तेलुगूदेशम पार्टी – भी उनका साथ नही दे रहे हैं. इनके अलावा एआईएडीएमके तथा बीजू जनता दल जैसे मित्र दल भी इस मुद्दे पर सरकार को समर्थन नहीं दे रहे हैं.

बिल का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों की मांग है कि इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया जाए. जिसके लिए मोदी सरकार राजी नहीं है.

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