सुप्रीम कोर्ट द्वारा संरक्षण को लेकर मोदी सरकार को लगी कड़ी फटकार के बाद अब ताजमहल को भी  निजी कंपनियों के हाथों में जाने की तैयारियां शुरू हो चुकी है। इससे पहले लाल किले सहित कई इमारतों को निजी कंपनियों को दिया जा चुका है।

पर्यटन मंत्री के जे अल्फॉन्स ने मंगलवार को कहा कि अगर रोम में 2000 साल पुराने कोलोसियम के पुनर्निर्माण का जिम्मा जूता बनाने वाली एक कंपनी को दिया जा सकता है तो सरकार की एडॉप्ट – ए – हैरीटेज योजना के तहत ताजमहल की देखरेख का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपे जाने में क्या दिक्कत है।

पर्यटन मंत्रालय की एडॉप्ट – ए – हैरीटेज योजना के बारे में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विवाद तब पैदा हुआ जब लाल किले की देखरेख का जिम्मा सीमेंट कंपनी डालमिया भारत ग्रुप को दिया गया, लेकिन यह समझौता योजना के मुताबिक किया गया। अब ताजमहल एडॉप्ट – ए – हैरीटेज योजना के तहत स्मारकों की सूची में शामिल है।

उन्होंने बताया, ‘इस योजना के तहत सूची में बड़ी संख्या में स्मारक शामिल हैं और ताज भी सूची में है। अगर कोलोसियम की देखरेख जूते बनाने वाली एक कंपनी कर सकती है तो ताज क्यों नहीं ? अल्फॉन्स ने कहा कि यह योजना सरकार की पर्यटन नीति का बड़ा हिस्सा है और एनजीओ और कोरपोरेट्स को आगे आने और ऐसी और धरोहरों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

बता दें कि कुछ दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए केंद्र सरकार से कहा था कि एफ़िल टॉवर को देखने 80 मिलियन लोग आते है, जबकि ताजमहल के लिए मिलियन लोग आते है। आप लोग ताजमहल को लेकर गंभीर नहीं है और न ही आपको इसकी परवाह है। हमारा ताज ज्यादा खूबसूरत है और आप टूरिस्ट को लेकर गंभीर नहीं है। ये देश का नुकसान है, ताजमहल को लेकर घोर उदासीनता है। कोर्ट ने कहा – क्या आपको पता है कि आपकी उदासीनता से देश को कितना बड़ा नुकसान हो रहा है?

जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने उत्‍तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि ताजमहल के आसपास उद्योगों को बढ़ाने के लिए अनुमति क्‍यों दी गई? सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड के चेयरमैन को नॉटिस जारी किया। कोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार से साफ शब्दों में कहा कि अगर आप इमारत को सहेज नहीं सकते, तो इसे ढहा दीजिए।