राफेल सौदे को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्र की मोदी सरकार को कांग्रेस ने एक बार फिर से मजबूती से निशाना बनाया जिसके चलते उसे दोबारा सुप्रीम कोर्ट जाने पर मजबूर होना पड़ा है।

केंद्र सरकार ने याचिका दाखिल कर राफेल डील पर दिये गए फैसले में एक ”तथ्यात्मत सुधार” की मांग की है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले के उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है, जिसमें कैग (CAG) रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में संदर्भ है।

Loading...

एक विधि अधिकारी ने बताया कि अदालत को अवगत कराने के लिए याचिका दायर की गयी है कि कैग और पीएसी से जुड़े मुहरबंद दस्तावेज के मुद्दे पर अलग-अलग व्याख्या की जा रही। नोट में कहा गया है कि सरकार कैग के साथ मूल्य विवरण को साझा कर चुकी है। यह वाक्य भूतकाल (पास्ट टेन्स) में लिखा गया है और यह ‘‘तथ्यात्मक रूप से सही’’ है।

याचिका में कहा गया है कि उक्त नोट मोटे अक्षरों में लिखा गया है। इसमें मोटे अक्षरों में लिखे गए वाक्य में कहा गया है कि सरकार मूल्य विवरणों को कैग के साथ साझा कर चुकी है। कैग की रिपोर्ट का पीएसी परीक्षण कर रही है। रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद में रखा गया और यह सबके सामने है।

supreme court

याचिका के मुताबिक शब्द ‘हैज बीन (हो चुका है)’ भूतकाल में इस्तेमाल हुआ है जिसके बारे में लिखा है कि सरकार कैग के साथ मूल्य विवरण को पहले ही साझा कर चुकी है। यह भूतकाल में है और तथ्यात्मक रूप से सही है। वाक्य के दूसरे हिस्से में पीएसी के संबंध में है। इसमें कहा गया है कि कैग की रिपोर्ट का पीएसी परीक्षण कर रही है। फैसले में ‘इज’ की जगह ‘हैज बीन’ का इस्तेमाल हुआ है।

केंद्र ने शीर्ष अदालत के आदेश में आवश्यक संशोधन की मांग करते हुए कहा कि इसी तरह फैसले में यह कथन है कि रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद के सामने रखा गया। इस बारे में कहा गया कि रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद के सामने रखा गया और यह सार्वजनिक है।

याचिका के मुताबिक, नोट में केंद्र की ओर से यह कहा गया है कि कैग रिपोर्ट का पीएसी परीक्षण कर रही है। यह प्रक्रिया की व्याख्या है जो आम तौर पर अपनायी जाती है लेकिन फैसले में अंग्रेजी में ‘‘इज’’ यानि ‘‘है’’ की जगह ‘‘हैज बीन’’ अर्थात ‘‘कर चुकी है’’ का इस्तेमाल हुआ है।

सरकार ने ऐसे वक्त याचिका दायर की है जब विपक्षी कांग्रेस और अन्य ने मुद्दे पर सवाल उठाए हैं और सरकार पर कैग रिपोर्ट को लेकर शीर्ष न्यायालय को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। मोदी सरकार को बड़ी राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह राफेल लड़ाकू विमान सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया से ‘‘संतुष्ट’’ है।

शीर्ष अदालत ने जांच की मांग खारिज कर दी जिसके बाद इस फैसले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें