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दो साल पहले सीबीआई निदेशक बनने की कतार में शामिल रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रूपक दत्‍ता ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गुजरात कैडर के राकेश अस्‍थाना के लिए उन्‍हें हटा दिया गया था।

दत्‍ता ने द टेलीग्राफ अखबार से बातचीत में कहा कि उन्‍हें ‘विश्‍वास है कि अस्‍थाना की जगह बनाने के दिसंबर, 2016 में उनका ट्रांसफर गृह मंत्रालय कर दिया गया।’ तब दत्‍ता सीबीआई के विशेष निदेशक थे। उन्‍होंने कहा कि वह सीबीआई में जारी अंदरूनी कलह से हैरान नहीं हैं।

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दत्‍ता के अनुसार, सरकार अपने वफादारों को उच्‍च पदों पर बिठाने के लिए ”जोड़-तोड़” करती रही है। अचानक ट्रांसफर के बाद पहली बार दत्‍ता ने पहली बार अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। उन्‍होंने अखबार से कहा, ”जो हम देख रहे हैं, वह भगवान की करनी है, सरकार की जोड़-तोड़ का नतीजा है।”

1981 बैच के आईपीएस अधिकारी दत्‍ता ने कहा, ”सरकार पहले ही तय कर चुकी थी कि एजंसी की कमान अस्‍थाना को देनी है। इसलिए उसने मुझे हटाया और 2 दिसंबर को (जिस दिन सिन्‍हा रिटायर हुए) उन्‍हें (अस्‍थाना) अंतरिम निदेशक बना दिया। इस विचार के साथ कि कुछ समय बाद उन्‍हें पूर्ण-कालीन निदेशक नियुक्‍त कर दिया जाएगा।”

बता दें कि दिसंबर, 2016 में तत्‍कालीन सीबीआई निदेशक अनिल सिन्‍हा के रिटायर होने के तीन पहले, आश्‍चर्यजनक ढंग से दत्‍ता का ट्रांसफर कर दिया गया था। अपनी वरिष्‍ठता के चलते दत्‍ता सीबीआई निदेशक बनने की रेस में सबसे आगे थे। उनके जाने के बाद, तब एडिशनल डायरेक्‍टर रहे अस्‍थाना एजंसी के सबसे वरिष्‍ठ अधिकारी बन गए थे।

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