नई दिल्ली | गाय को लेकर हमेशा आक्रमक मुद्रा में रहने वाली बीजेपी को मोदी सरकार का नया फैसला असहज कर सकता है. इस फैसले के बाद बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लग सकता है. दरअसल मोदी सरकार ने सेना को तीन महीने के अन्दर सभी सैन्य गौशालाए बंद करने का आदेश दिया है. सरकार के इस फैसले से इन गौशालाओ में रह रही 20 हजार गायो के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए है.

इसके अलावा इन गौशालाओ में करीब ढाई हजार कर्मचारी काम करते है. गौशालाए बंद होने के बाद इन पर भी रोजगार का संकट आ सकता है. देश में करीब 39 सैन्य गौशालाए है जिनमे देश की सबसे उन्नत नस्ल की गाय पाली जाती है. माना जाता है की ये गाय देश में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय है. इन्ही गौशालाओ से सेना को मिलने वाले दूध की आपूर्ति होती है. सरकार ने 20 जुलाई को हुई कैबिनेट मीटिंग में सेना को आदेश दिया की वो तीन महीने के अन्दर सेना की सभी गौशालाओ को बंद कर दे. इसके अलावा सेना के जवानो के लिए डेरी से दूध खरीदने का भी आदेश दिया गया.

सरकार के इस फैसले से आल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिफेन्स वर्कर खुश नही है. उनका कहना है की इससे हजारो लोग बेरोजगार हो जायेंगे. उनका कहना है की इस फैसले से देश की सबसे उन्नत नस्ल की गायो की भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है. उधर आईसीएआर के वैज्ञानिको का कहना है की हम यह नही बता सकते की सैन्य गौशालाए बंद होने के बाद 20 हजार गायो का क्या होगा क्योकि देशी की कोई भी फर्म इन गायो को रखने में सक्षम नही है.

सरकार के इस फैसले के पीछे की मंशा के बारे में कहा जा रहा है की हाल ही में सैन्य गौशालाओ में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आये है जो इस फैसले की मुख्य वजह है. इसके अलावा कुछ निजी मिल्क डेयरी और डेयरी उधोग को बढ़ावा देने के लिए भी यह फैसला लिया गया है. बताते चले की सैन्य गौशालाओ की शुरुआत ब्रिटिश राज में हुई थी. देश की पहली सैन्य गौशाला 1889 में इलाहाबाद में शुरू की गयी थी.

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