Sunday, August 1, 2021

 

 

 

#CAA पर बवाल थमा नहीं, मोदी सरकार अगले हफ्ते दे सकती है ‘एनपीआर’ को हरी झंडी

- Advertisement -
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी पर मचे घमासान के बीच नरेन्द्र मोदी की सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को एक बार फिर से धरातल पर उतारने में जुटी है। अगले हफ्ते होने वाली कैबिनेट की बैठक में एनपीआर के नवीनीकरण को हरी झंडी मिलने की संभावना है। पश्चिम बंगाल और केरल सरकार ने एनपीआर का भी विरोध किया है। हालांकि यह एनआरसी से पूरी तरह अलग है।

- Advertisement -

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर(NPR) के तहत एक अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है। एनपीआर का पूरा नाम नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर है। देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है। इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी।

बता दें कि पश्चिम बंगाल और केरल सरकार ने एनपीआर का भी विरोध किया है। हालांकि यह NRC से पूरी तरह अलग है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार में 2010 में एनपीआर बनाने की पहल शुरू हुई थी। तब 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था।  अब फिर 2021 में जनगणना होनी है।  ऐसे में एनपीआर पर भी काम शुरू हो रहा है। एनपीआर और एनआरसी में अंतर है।

क्या है एनपीआर

NPR देश के सभी सामान्य निवासियों का दस्तावेज है और नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। कोई भी निवासी जो 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है तो उसे NPR में अनिवार्य रूप से पंजीकरण करना होता है। 2010 से सरकार ने देश के नागरिकों की पहचान का डेटाबेस जमा करने के लिए इसकी शुरुआत की। इसे 2016 में सरकार ने जारी किया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles