विधवाओं की और ध्यान नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ी फटकार लगाते हुए जुर्माना लगाया हैं. साथ ही अपनी टिपण्णी में कहा कि सरकार खुद काम करती नहीं हैं और फिर दावा करती हैं कि अदालतें ‘सरकार चलाने की कोशिश कर रही हैं’

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने देश में निराश्रित विधवाओं की स्थिति में सुधार के लिए अपने निर्देशों के बावजूद सहमति युक्त दिशा-निर्देशों के साथ न आने पर सरकार पर एक लाख रपये का जुर्माना भी लगाया हैं.

संयुक्त बेंच ने कहा है कि आपको भारत की विधवाओं का ख्याल नहीं है. आप उनकी चिंता नहीं करते. आप एक ऐफीडेविट दाखिल करें और उसमें कहें कि आप भारत की विधवाओँ के लिए चिंतित नहीं हैं. आपने कुछ नहीं किया है…यह पूरी तरह से लाचारी है. सरकार कुछ करना ही नहीं चाहती.

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शीर्ष अदालत ने पहले ही केंद्र सरकार को कहा था कि वो राष्ट्रीय महिला आयोग के सुझावों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाने और देश की विधवाओँ की स्थिति में सुधार लाने के लिए दिशा निर्देश तैयार करें. लेकिन इसके बावजूद भी बैठक नहीं की गई.

इस पर बेंच ने कहा कि आपने कहा था कि 12 और 13 अप्रैल को बैठक प्रस्तावित है लेकिन आपने बैठक नहीं की और अब स्पष्टीकरण दे रहे हैं.

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