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भारतीय सेना में मोदी सरकार बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती करने पर विचार कर रही हैं। सेना में हथियारों की ख़रीद का हवाला देकर अगले पांच साल में 1.5 लाख जवानों की कटौती हो सकती है। इससे बचने वाले 5 से 7 हज़ार करोड़ रुपये से हथियार खरीदे जाएंगे।

जनरल रावत की योजना के पहले चरण में सेना में अधिकारियों और जवानों की संख्या 50 हजार तक घटाई जा सकती है।मौजूदा समय में सेना का कुल बजट 1.28 लाख करोड़ रुपया है। इसमें से 83 फीसद दैनिक खर्च और वेतन में ही खप जाता है। इसके बाद सेना के पाास महज 26,826 करोड़ रुपये बचता है। डेढ़ लाख नौकरियां खत्‍म करने के बाद सेना के पास खर्च करने के लिए 31,826 से 33,826 हजार करोड़ रुपये होंगे।

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बता दें कि फिलहाल सेना में करीब 13 लाख सैन्यकर्मी हैं। रक्षा मंत्रालय पहले ही सेना के लिए विभिन्न सुधारों की घोषणा कर चुका है, जिनमें करीब 57,000 अधिकारियों और अन्य कर्मियों की पुनर्तैनाती और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल शामिल है।

अधिकारियों ने बताया कि जवानों की कटौती का लक्ष्य सेना के प्रत्येक विभाग के पुनगर्ठन से हासिल किया जाएगा। इनमें सैन्य मुख्यालय निदेशालय, रणनीतिक प्रभाग, संचार अवस्थापना, मरम्मत विभाग, प्रशासनिक विभाग और सहायक क्षेत्र शामिल है। पैनल ने हाल के वर्षों में तंत्र में तकनीक को शामिल करने के बावजूद बहुस्तरीय पद सृजित होने पर भी चिंता जताई है।

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