भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने देश में नौकरियों की कमी को लेकर मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होने कहा कि बीते 5 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्याप्त रोजगार पैदा नहीं हुए हैं। उन्होंने मोदी सरकार को आलसी बताते हुए कहा कि इसे सबका साथ तो मिला था लेकिन सबका विकास नहीं हो रहा है।

शुक्रवार को उन्होंने कहा,” (वर्तमान) ग्रोथ रेट से पर्याप्त नौकरियों का सृजन नहीं हो पा रहा है। आप इसे अंको की श्रेणी में रखकर समझ सकते हैं। रेलवे की 90,000 नौकरियों के लिए 2.5 करोड़ लोग आवेदन कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि 25 सालों से 7 फीसदी का ग्रोथ काफी अच्छा है। लेकिन, इसका लाभ कुछ लोगों को मिल रहा है, जबकि कुछ लोग वंचित रह रहे हैं।

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पूर्व गवर्नर ने कहा, बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था का लाभ उठाने में काफी विषमता देखी जा सकती है। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में किसानों की खराब हालत का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने निर्यात और श्रम के क्षेत्र महिलाओं की भागीदारी कम होने पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस सरकार के दौर में सरकार के खज़ाने में भी कोई सुधार नहीं हुआ है।

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रघुराम राजन ने राजकोषीय घाटे पर चिंता जताते हुए कहा कि इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। पूर्व आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सरकारी बैंकों पर सरकार के आदेशों और निर्देशों के बोझ को कम करने की जरूरत है। उनके मुताबिक सरकारी दखल छोटे सरकारी बैंकों के छोटे शेयर धारकों के हितों के खिलाफ भी है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार को किसी मामले में दखल देना जरूरी हो तो इसके लिए पहले फंड की व्यवस्था होना चाहिए।

उन्होंने श्रम क्षेत्र की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इस मामले में भारत की हालत दूसरे विकासशील देशों के मुकाबले काफी खराब है। उन्होंने कहा कि, “समझना चाहिए कि आखिर लोग भारतीय श्रमिकों की तरफ क्यों नहीं देख रहे? देखना होगा कि आखिर स्किलिंग यानी कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में कहां कमियां हैं? स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या खराबियां हैं? हमें लोगों की काम करने की क्षमता बढ़ाना होगी।”

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