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पीएनबी बैंक घोटाले के आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के देश से भागने के सबंध में कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसमे मोदी सरकार की मिली भगत का गंभीर आरोप लगाकर सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि PMO को  2015 से ही इन दोनों की धोखाधड़ी के बारें में थी।

कांग्रेस ने सोमवार को राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से सवाल किया। जिसमे पूछा गया कि क्या यह एक तथ्य है कि सार्वजनिक बैंक पीएनबी को घाटोले के बारे में पीएमओ को साल 2016 से ही जानकारी थी, यदि ऐसा है तो पीएमओ ने इस संबंध में क्या कदम उठाए और यदि कोई कदम नहीं उठाए गए तो उसका क्या कारण है?”

केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री अपने जवाब में कहा कि “जी हां, शिकायत के संबंध में संबंधित विभागों वित्त सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय को 1 मार्च 2018 को कार्यालय ज्ञापन के जरिए घोटाले के बारे में सूचित किया गया था।”

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बता दें कि इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि ‘भगोड़ों का साथ, भगोड़ों का विकास’ इस सरकार का नया नारा बन गया है। उन्होने कहा,  ‘‘रघुराम राजन ने कहा है कि 2016 में उन्होंने बकायदा एक ‘फ्रॉड रिपोर्टिंग और मॉनीटंिरग अथॉरिटी’ बनाई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय को सब भगोड़ों के नाम भेजे थे, पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने कुछ नहीं किया।’’

उन्होंने कहा कि 7 मई 2015 को पहली बार वैभव खुरानिया ने नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के बारे में पीएमओ को पूरी जानकारी तथ्यों के साथ दी, इसकी जानकारी एसएफआईओ को भी दी गई थी। बावजदू इसके इस मामले में सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आगे कहा, “26 मई, 2015 को प्रधानमंत्री कार्यालय इस शिकायत की पावती दिया था। इससे साबित होता है कि 7 मई, 2015 को नीरव मोदी की धोखाधड़ी की जानकारी पीएमओ और अन्य एजेंसियों को मिल गई थी।”

सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘लगता है कि चोकसी ने भारत की मोदी सरकार की एजेंसियों के साथ सांठगांठ से वापस आने का मन बनाकर आज एक समाचार एजेंसी को साक्षात्कार दिया। अब एक बात साफ है कि मेहुल चोकसी और नीरव मोदी द्वारा 24,000 करोड़ रू की जालसाजी कर देश से भागने में सीधे-सीधे चौकीदार और उनका कार्यालय संलिप्त है।’’

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