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नई दिल्ली: केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) की तरफ से छह इंस्टीट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस) का दर्जा दिया गया है। जिसमे अंबानी घराने की जियो इंस्टीट्यूट भी है।

सबसे खास बात ये है कि नीता अंबानी की अगुवाई में रिलायंस फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित जियो इंस्टीट्यूट अभी लांच भी नहीं हुई है। लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को जियो इंस्टीट्यूट को ‘उत्कृष्ट संस्थान’ का दर्जा दे डाला।

इस मामले मे कॉंग्रेस ने मोदी सरकार से पूछा कि जियो इंस्टीट्यूट अब तक बना ही नहीं है तो सरकार कैसे उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दे सकती है? पार्टी ने कहा, ”बीजेपी की सरकार ने एक बार फिर मुकेश अंबानी और नीता अंबानी को फायदा पहुंचाया। जियो इंस्टीट्यूट जो अस्तित्व में ही नहीं है उसे इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा दिया गया। सरकार को सफाई देनी चाहिए कि इस तरह के स्टेट्स देने का क्या पैमाना है।”

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वहीं असम से पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगाई ने ट्वीट कर कहा, ”बीजेपी सरकार द्वारा आईआईटी बंबई, आईआईएससी आदि के साथ जियो इंस्टीट्यूट को ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ का दर्जा दिया जाना हास्यास्पद है। रिलायंस फाउंडेशन का जियो इंस्टीट्यूट अभी अस्तित्व में नहीं है। यह मोदी सरकार को एक्सपोज करती है कि वह अपने कॉरपोरेट फ्रेंड्स को लगातार मदद पहुंचा रही है।”

विवाद बढ़ने पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि यूजीसी रेगुलेशन 2017, के क्लॉज 6.1 के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में बिल्कुल नए संस्थानों को भी शामिल किया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि जियो इंस्टीट्यूट को ग्रीनफील्ड कैटेगरी के तहत चुना गया है, जो कि नए संस्थानों के लिए होती है।

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