शरणार्थी तौर पर रहे रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज मोदी सरकार ने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है. जिसमे रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को भारत में संवैधानिक अधिकारी देने से इनकार कर दिया.

हलफनामा में कहा गया कि रोहिंग्या शरणार्थियों को देश में नागरिक की सुविधा देना गैर-कानूनी है. रोहिंग्या मुसलमानों का पाकिस्तान से कनेक्शन है. वे आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं. ऐसे में देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनका भारत में रहना सही नहीं है.

हालांकि केंद्र सरकार ने ये भी कहा है कि जिन रोहिंग्या मुसलमानों के पास संयुक्त राष्ट्र का दस्तावेज है उन्हें देश से बाहर नहीं निकाला जाएगा. साथ ही ये भी बताया कि भारत में अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या 40 हजार से ज्यादा है. सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए इस मामले को 3 अक्टूबर तक टाल दिया है.

केंद्र ने कहा है कि रोहिंग्या शरणार्थी नॉर्थ ईस्ट कॉरिडोर की स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं. रोहिंग्या देश में रहने वाले बौद्ध नागरिकों के खिलाफ हिंसक कदम उठा सकते हैं. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अवैध रोहिंग्या शरणार्थी हुंडी/हवाला कारोबार, मानव तस्करी जैसी अवैध और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं.

ध्यान रहे इस मुद्दे पर सयुंक्त राष्ट्र भारत की तीखी आलोचना कर चूका है. भारत को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति जवाबदेह बताते हुए सयुंक्त राष्ट्र ने कहा कि ‘भारत सामूहिक तौर पर इन्हें नहीं निकाल सकता है या ऐसी जगह पर नहीं भेज सकता है, जहां इनके लिए उत्पीड़न या हिंसा का खतरा मौजूद है.’ सयुंक्त राष्ट्र के मुताबिक भारत में शरण लेने वाले 40 हजार रोहिंग्या मुसलमानों में 16,000 के पास शरणार्थी दस्तावेज मौजूद हैं.

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