महंगाई को काबू करने के वादे के साथ केंद्र की मोदी सरकार अपने शासन के तीन साल पुरे होने पर भी महंगाई से निजात नहीं दिला पाई हैं. एक बार फिर से मोदी सरकार के तमाम दावों के उलट महंगाई में बढोतरी के साथ औद्योगिक उत्पादन में गिरावट के कारण देश की अर्थव्यवस्था को दोहरा झटका लगा हैं.

मार्च में रिटेल महंगाई दर यानि सीपीआई बढ़कर 3.81 फीसदी रही है. फरवरी में रिटेल महंगाई दर 3.65 फीसदी रही थी. अब रिटेल महंगाई पांच महीने के उच्च स्तर 3.81 प्रतिशत पर पहुंच गई हैं. दूध एवं दुग्ध उत्पाद तथा अंडा जैसे प्रोटीन युक्त खाने के सामान आलोच्य महीने में महंगे हुए और इनकी महंगाई दर क्रमश: 5.13 प्रतिशत तथा 2.96 प्रतिशत रही. तैयार खाना, स्नैक और मिठाई की कीमतों में भी मार्च में सालाना आधार पर 6.13 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

महीने दर महीने आधार पर मार्च में फ्यूल, लाइट की महंगाई दर 3.9 फीसदी से बढ़कर 5.56 फीसदी रही है. महीने दर महीने आधार पर मार्च में कपड़ों, जूतों की महंगाई दर 4.38 फीसदी से बढ़कर 4.6 फीसदी रही है. वहीँ अनाजों की महंगाई दर 5.3 फीसदी से मामूली बढ़कर 5.38 फीसदी रही है.

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साथ ही दूध की महंगाई दर 4.22 फीसदी से बढ़कर 4.69 फीसदी रही है. इसके अलावा दालों की महंगाई दर -9.02 फीसदी से बढ़कर -12.42 फीसदी रही है. ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई दर मार्च महीने में बढ़कर 5.75 प्रतिशत रही हैं.

हालांकि सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सब्जियों के दाम लगातार नीचे बने हुए हैं. इसके भाव इस बार मार्च महीने में एक साल पहले की तुलना में 8.57 प्रतिशत नीचे रहे.

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