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मुस्लिम देशों को बड़े कर्ज देने वालों मे से एक इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक के पैसो के जरिए अब मोदी सरकार देश के विकास करना चाहती है। दरअसल,  भारत अपने बुनियादी ढांचे क्षेत्र में सऊदी अरब के निवेश की मांग कर रहा है।

ऐसे मे अब अब इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक ने भारत के बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में निवेश करने के लिए अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों के साथ गठजोड़ करने में दिलचस्पी दिखाई है।

इसके अलावा सऊदी अरब के पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड (पीआईएफ) भी भारत में निवेश करना चाहता है। इतना ही नहीं सऊदी अरब तेल कंपनी, या सऊदी अरामको ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी में बसे बड़ी वैश्विक रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स स्थापित करने के लिए भारतीय राज्य संचालित कंपनियों के साथ साझेदारी की है।

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एआईबी के मुताबिक भारत को अगले 10 सालों में बुनियादी ढांचे के निवेश में 1.5 अरब डॉलर निवेश की आवश्यकता है। भारत में बुनियादी ढांचे पर 2014-15 में 1.81 ट्रिलियन का आबंटन किया गया जो 2017-18 में 4.9 4 ट्रिलियन तक पहुंच गया। भारत चालू वित्त वर्ष में इस क्षेत्र में 5.9 7 ट्रिलियन तक निवेश बढ़ने की योजना बना रहा है।

वहीं 57 सदस्य देशों वाला इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक शुरुआत के बाद से अब तक 130.8 अरब डॉलर का वित्त पोषण कर चुका है। जिसके शीर्ष पांच लाभार्थियों बांग्लादेश (14.9%), पाकिस्तान (8.9%), मिस्र (8.8%), तुर्की (8.3%) और मोरक्को (5%) हैं।

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