केंद्र ने एनएससीएन-आईएम की नगालैंड के लिए अलग ध्वज, अलग संविधान की मांग को खारिज कर दी है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि विद्रोही समूह के साथ बंदूकों के साए में वार्ता स्वीकार्य नहीं है।

नगा वार्ता के लिए वार्ताकार और नगालैंड के राज्यपाल आर. एन. रवि ने कहा कि केंद्र सरकार दशकों लंबी शांति बातचीत की प्रक्रिया को अंजाम पर पहुंचाएगी, रवि ने बयान जारी कर कहा कि परस्पर सहमति से विस्तृत समझौते का मसौदा तैयार किया गया है जिसमें सभी महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।

बयान में कहा गया है, ‘‘दुर्भाग्य से इस समय एनएससीएन-आईएम ने देर करने का रूख अपना रखा है और अलग नगा राष्ट्रीय झंडा और संविधान जैसे विवादास्पद मुद्दों को उठा रहा है जिस पर वे भारत सरकार के रूख से पूरी तरह अवगत हैं।’

गौरतलब है कि एनएसीएन-आईएम के महासचिव थुइंगलेंग मुइवा और आरएन रवि के तीन अगस्त, 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एक रूपरेखा के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। रवि ने कहा कि एनएससीएन-आईएम ने समझौते के प्रारूप को ‘‘शरारतपूर्ण तरीके” से लंबा खींचा है और इसमें काल्पनिक विषय डाल रहा है।

रवि ने बयान में कहा कि एनएससीएन-आईएम के कुछ नेता विभिन्न मीडिया संगठनों के माध्यम से लोगों को ‘‘बेतुकी धारणाओं और पूर्व धारणाओं” से गुमराह कर रहे हैं। और इस पर वे भारत सरकार के साथ पहले ही सहमत हो चुके हैं।

बयान में कहा गया है कि भारत सरकार वार्ता में शामिल सभी पक्षों से उम्मीद करती है कि लोगों की इच्छाओं पर ध्यान दें और तय समय के अंदर नगा शांति प्रक्रिया को निष्कर्ष पर पहुंचाने में मदद करें।

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