नई दिल्ली | एक कश्मीरी युवक को पत्थरबाजो से बचने के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल करने के फैसले पर मोदी सरकार ने सेना का साथ देने का फैसला किया है. सरकार ने इस फैसले को मुश्किल परिस्तिथियों में लिया गया फैसला करार दिया. वही सरकार ने कश्मीरी नेताओ पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और सेना को राजनितिक निशान बनाने का भी आरोप लगाया.

दरअसल 9 अप्रैल को सेना की एक यूनिट ने खुद को पत्थरबाजो से बचाने के लिए एक कश्मीरी युवक को अपनी जीप के आगे बांध दिया था. यही नहीं सेना ने इस युवक के सीने पर एक पोस्टर पर भी लगाया हुआ था जिस पर लिखा था ‘मैं पत्थर बाज हूँ’. कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना का विडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सेना की कार्यवाही पर सवाल उठाये थे.

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हालाँकि सेना ने इस कार्यवाही के लिए अपना बचाव करते हुए कहा था की उप चुनावो के दौरान कुछ बूथों पर हिंसा की खबर मिलने के बाद सेना की एक यूनिट वहां भेजी जा रही थी. लेकिन रास्ते में हमें सैंकडो पत्थरबाजो पर प्रदर्शनकारियो ने घेर लिए. इसलिए अधिकारियो , राज्य कर्मचारियों, ITBP और पुलिस बल के जवानों की सुरक्षा सुनिश्च्ति करने के लिए यह कदम उठाया गया.

इस मामले की जाँच रिपोर्ट सरकार को सौप दी गयी है. जांच रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने उस अधिकारी का बचाव करने का फैसला किया है जिसने इस तरह का आदेश दिया था. रिपोर्ट में कहा गया की अधिकारी ने मुश्किल परिस्थिति से बचने के लिए अनिच्छा से यह फैसला लिया. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री जीतेन्द्र सिंह ने कहा की सेना को राजनितिक निशाना बनाया जा रहा है. कश्मीरी नेता आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले अपराधियों की आलोचना करने की बजाय सेना के जवानों को सॉफ्ट टारगेट बना रहे है.

खबर है की रक्षा मंत्री अरुण जेटली सोमवार को सेना कमांडरो के साथ एक बैठक करेंगे जिसमे इस मुद्दे पर भी बात होने के आसार है. वही सरकार ने उस अधिकारी के फैसले की भी तारीफ की है जिसने कश्मीरी को सेना जीप के आगे बाँधने का आदेश दिया था. हालाँकि सेना का कहना है की जीप के आगे बांधा गया युवक पत्थरबाज था लेकिन उसने मीडिया के सामने आकर बताया की वो एक शोल बुनकर है, पत्थर बाज नही.

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