india's prime minister narendra modi speaks at the opening plenary during the world economic forum (wef) annual meeting in davos

india's prime minister narendra modi speaks at the opening plenary during the world economic forum (wef) annual meeting in davos

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के वार्षिक शिखर सम्मेलन को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने उधोगपतियो को भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि अस्थिरता के दौर में भारत निवेश करने के लिए सबसे भरोसेमंद देश है। इसके अलावा उन्होंने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर भी अपनी राय रखी।

क़रीब एक घंटे के सम्बोधन में उन्होंने अपनी सरकार की आर्थिक नीतियो को सामने रखा। उन्होंने कहा कि क़रीब 20 दशक पहले 1997 में देवगौडा जी यहाँ आए थे। उस समय भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 400 अरब डालर से कुछ अधिक थी। अब यह उसके छह गुणा से अधिक बढ़ चुका है। इस दौरान उन्होंने जीएसटी और नोटबंदी जैसे फ़ैसलों का भी ज़िक्र किया।

लेकिन इन सबके बीच मोदी कुछ ऐसा बोल गए जिसने पूरे देश को चकित कर दिया। उन्होंने देश के मतदाताओं की संख्या को 600 करोड़ बता दिया। हैरान कर देने वाली बात यह है की उनके भाषण के इस अंश को पीएमओ के अधिकारिक ट्वीटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया। जो बाद में डिलीट कर दिया गया। इसके अलावा कई न्यूज़ चैनल ने भी अपने ट्वीटर हैंडल से इसे ट्वीट कर दिया।

इस तरह एक अंतरराष्ट्रीय मंच से ग़लत आँकड़े पेश करने के कारण मोदी को सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ा। इसलिए मामला बढ़ता देख पीएमओ समेत सभी न्यूज़ चैनल ने उस ट्वीट को डिलीट कर दिया। दरअसल मोदी ने दावोस में कहा की भारत के 600 करोड़ मतदाताओं ने 2014 में 30 साल बाद पहली बार किसी एक राजनीतिक पार्टी को केंद्र में सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत दिया। जबकि देश में मतदाताओं की संख्या 80 करोड़ के क़रीब है।

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