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केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के अनुसार केंद्र की मोदी सरकार ने देश के अल्पसंख्यकों के लिए मेडिकल, आयुर्वेद, यूनानी समेत बेहतर पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा मुहैया कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के पांच शिक्षण संस्थान स्थापित करने की योजना बनाई है.

नकवी के अनुसार, इन शिक्षण संस्थानों की स्थापना की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन भी किया गया है जो दो महीने में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. केंद्रीय मंत्री ने इस बारें में बताया कि आधुनिक तकनीकी, मेडिकल, आयुर्वेद, यूनानी सहित विश्वस्तरीय कौशल विकास की शिक्षा देने वाले पांच विश्वविद्यालय देश भर में स्थापित किये जायेंगे.

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इन शिक्षण संस्थानों में 40 प्रतिशत आरक्षण लड़कियों के लिए किये जाने का प्रस्ताव है और ये शिक्षण संस्थान 2018 से काम करना शुरू कर देंगे. नकवी ने बताया कि हमारी कोशिश है कि आधुनिक सुविधाओं सहित विश्वस्तरीय शिक्षा का आदर्श शैक्षिक केंद्र एवं रोजगारपरक कौशल विकास संस्थान स्थापित करना शिक्षा के साथ रोजगार मुहैय्या कराने का एक बड़ा मिशन साबित हो.

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने बताया कि बैठक में अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण और कौशल विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. इनमे लड़कियों के लिए ‘‘बेगम हजरत महल स्कालरशिप’’ शामिल हैं. इसके अलावा देश भर में ‘‘गरीब नवाज स्किल डेवलपमेंट सेंटर’’ स्थापित करने की घोषणा भी की गई.

नकवी ने कहा कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यक समुदायों को बेहतर से बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है. हमारा जोर अल्पसंख्यकों को बेहतर शिक्षा और इसके साथ ही रोजगार प्रदान करने पर है. पिछले बजट में घोषित 3827 करोड़ रुपये में से लगभग 2800 करोड़ रुपये स्कॉलरशिप, ट्रेनिंग सहित अन्य शैक्षिक गतिविधियों के लिए दिए जा रहे हैं. इनमें 1816 करोड़ रुपये की छात्रवृतियां शामिल हैं.


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