नई दिल्ली : शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगाने से संबंधित अपनी रिपोर्ट न सौंपने पर कड़ी फटकार लगाई है। हालांकि इस दौरान केंद्र ने कोर्ट को बताया कि लिंचिंग को लेकर कानून बनाने के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर का गठन किया जा चुका है।

अलवर में रकबर की हत्या के मामले में जवाब-तलब करने पर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन पुलिस वालों का ट्रांसफर करने के साथ एक को निलंबित किया गया है। दोषी अफसरों पर भी कार्रवाई हुई है। सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा कि आरोपियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।

कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने इस बारे में केवल 11 राज्यों द्वारा रिपोर्ट पेश करने पर अपनी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि 29 राज्यों तथा सात केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 11 ने भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और गोरक्षा के नाम पर हिंसा जैसे मामलों में कदम उठाने के शीर्ष अदालत के आदेश के अनुपालन के बारे में रिपोर्ट पेश की है।

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पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी कि यदि उन्होंने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश नहीं की तो उनके गृह सचिवों को न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना पड़ेगा।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए  कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।

मॉब लिंचिंग मामले में उत्तर सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सभी जिलों के SP को नोडल ऑफिसर बनाया गया है। नोडल ऑफिसर टॉस्क फोर्स का गठन किया है जो उन लोगों पर नजर रखेगी जो हिंसा को भड़काते है या अफ़वाह के जरिये माहौल बनाने की कोशिश करते है।

नोडल ऑफिसर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ हर महीने में कम से एक बार मीटिंग करेगा। नेशनल हाई वे पर पुलिस की पेट्रोलिंग शुरू की जा जा चुकी है। उन इलाकों में भी पेट्रोलिंग की जा रही है जहाँ लिंचिंग की घटनाएं हुई है।

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