Friday, December 3, 2021

शोपियां एनकाउंटर में हुआ अफस्पा का दुरुपयोग, मजदूरों को बताया गया था आतंकी?

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18 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सेना के ऑपरेशन एम्सिपोरा के तहत हुए एनकाउंटर में भारतीय सेना ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए कार्रवाई का आदेश दिया है। दरअसल, मुठभेड़ की जांच में सेना को ‘प्रथम दृष्टया’ साक्ष्य मिले हैं कि उसके जवानों ने सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) के तहत मिली शक्तियों का घोर उल्लंघन किया है। इस संबंध में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।

श्रीनगर में रक्षा प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने कहा कि आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान नैतिक आचरण के लिए प्रतिबद्ध सेना ने सोशल मीडिया पर सामने आई उन रिपोर्टों के बाद जांच शुरू की, जिसमें दावा किया गया था कि जम्मू के राजौरी जिले के रहने वाले तीन व्यक्ति अमशीपुरा से लापता हुए थे। जांच को चार सप्ताह के भीतर ही पूरा कर लिया गया।

सेना ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि जांच से कुछ निश्चित साक्ष्य सामने आए जो कि दर्शाते हैं कि अभियान के दौरान अफस्पा, 1990 के तहत निहित शक्तियों का दुरुपयोग किया गया और उच्चतम न्यायालय द्वारा स्वीकृत सेना प्रमुख की ओर से निधार्रित नियमों का उल्लंघन किया गया। इसके मुताबिक, परिणामस्वरूप, सक्षम अनुशासनात्मक प्राधिकरण ने प्रथम दृष्टया जवाबदेह पाए गए सैनिकों के खिलाफ सेना अधिनियम के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है।

बता दें कि रजौरी जिले के इम्तियाज अहमद, अबरार अहमद और मोहम्मद इबरार को सुरक्षा बलों ने 18 जुलाई, 2020 को अम्सीपोरा गांव में एक ऑपरेशन के दौरान मार गिराया था। हालांकि सुरक्षा बलों ने दावा किया कि तीनों आतंकवादी थे, जिनसे मुठभेड़ के बाद हथियार और गोला बारूद बरामद किया गया था। लेकिन उनके रिश्तेदारों ने कहा कि वे शोपियां जिले में मजदूरों के तौर पर काम करने आए थे और आंतकवाद से उनका कोई लेना-देना नहीं था।

पुलिस ने रिश्तेदारों की ओर से संदेह जताए जाने के बाद शिकायत दर्ज की है और मारे गए व्यक्तियों के डीएनए मिलान के लिए नमूने एकत्र किए गए हैं। अभी तीनों का डीएनए रिपोर्ट आना बाकी है। मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि शोपियां जिले में कथित मुठभेड़ में मारे गए तीन व्यक्तिों के मामले में दोषियों के खिलाफ की जाने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

उमर ने ट्वीट किया, ‘ मारे गए तीनों व्यक्तियों के परिजन लगातार उन्हें निर्दोष बताते रहे. सेना की ओर से शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई यह दर्शाती है कि सेना भी परिजन से सहमत है। यह प्रक्रिया आवश्यक तौर पर पारदर्शी रहनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।’

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