Sunday, December 5, 2021

‘हिन्दू राष्ट्र’ पर मेघालय हाईकोर्ट ने पलटा अपना विवादास्पद फैसला

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मेघालय हाईकोर्ट ने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने वाले अपने विवादित फैसले को किया खारिजकर दिया। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद याकूब मीर की खण्डपीठ ने इस फैसले को खारिज किया।

ध्यान रहे जस्टिस एसआर सेन की एकलपीठ के आदेश दिया था कि विभाजन के दौरान भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था। खण्डपीठ ने एकलपीठ के फैसले केा कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताया, कहा-‘एकलपीठ का आदेश संवैधानिक सिद्धांतों के साथ असंगत है।’

मूल निवास प्रमाणपत्र (डोमिसाइल सर्टिफ़िकेट) से जुड़े एक मामले पर सुनाए गए इस फ़ैसले में ये भी कहा गया था कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, क़ानून मंत्री और सांसदों से ऐसा क़ानून लागू करना चाहिए जिनके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से भारत में रहने आए हिंदुओं, सिखों, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई, ख़ासी, जैन और अन्य समुदाय के लोगों को नागरिता दी जा सके।

जस्टिस सेन से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था जिसके जवाब में उन्होंने कहा था, “मैं धार्मिक कट्टरपंथी नहीं हूं, बल्कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं क्योंकि मेरे लिए भगवान एक हैं।” इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अपील और जनहित याचिका भी लंबित है।

अब डिविज़न बेंच ने कहा है कि उस जजमेंट के निर्देश निरर्थक हैं. बेंच ने पिछले साल दिसंबर में दिए गए फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में लिखा है, “इस मामले पर विस्तार से गहन विमर्श के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि 10:12:2018 को दिया गया फ़ैसला क़ानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। इसलिए, उसमें जो भी राय दी गई और निर्देश जारी किए गए, पूरी तरह निरर्थक हैं। इसलिए इन्हें पूरी तरह से हटाया जाता है”

अन्य देशों से आए लोगों को नागरिकता दिए जाने के संबंध में जस्टिस सेन के फ़ैसले में जो बातें कही गई थीं, उनके संबंध में डिविज़न बेंच ने कहा है, “ये तो मुद्दे ही नहीं थे और इसमें देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और संविधान के प्रावधानों को ठेस पहुंचाने वाली बातें हैं।”

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