मेघालय के राज्यपाल वी षण्मुगनाथन ने आज रात इस्तीफा दे दिया है. यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे षण्मुगनाथन पर राजभवन के कर्मियों के एक समूह ने राज्यपाल के कार्यालय की गरिमा से ‘गंभीर समझौता’ करने का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाए जाने की मांग की थी

बुधवार को शिलांग में राजभवन में काम करनेवाले करीब 80 कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और गृह मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखकर राज्यपाल को तत्काल हटाने की मांग की थी. कर्मचारियों का आरोप था कि राज्यपाल की हरकतों से राजभवन की प्रतिष्ठा और राजभवन के कर्मचारियों की भावनाएं आहत हुई हैं.

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11-सूत्रीय पत्र में कहा गया कि राज्यपाल ने रात्री ड्यूटी पर दो जनसंपर्क अधिकारी, एक बावर्ची और एक नर्स को नियुक्त किया है और ये सभी महिलाएं हैं. पत्र में आरोप लगाया कि राज्यपाल ने अपना काम करने के लिए सिर्फ महिलाओं का चयन किया है और निजी सचिव पुरुष अधिकारी को अपने सचिवालय में भेज दिया है. राजभवन के कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि षणमुगनाथन ने राजभवन को ‘युवतियों का क्लब’ बना दिया.

ज्योति प्रसाद राजखोवा को हटाए जाने के बाद 67 वर्षीय षणमुगनाथन ने 20 मई 2015 को मेघालय के राज्यपाल का पद संभाला था. 13 सितंबर 2016 से उनके पास अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल का भी अतिरिक्त कार्यभार था. इस बीच महिला कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल को हटाने की मांग करते हुए यहां हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था. नौकरी पाने की प्रत्याशी एक महिला ने भी राज्यपाल पर आरोप लगाया था कि वह जब राजभवन में साक्षात्कार देने आई थी तो राज्यपाल ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया था.

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