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Source: ANI
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लखनऊ: बाबरी मस्जिद की जमीन को समझौते के नाम पर राम मंदिर निर्माण के लिए सौपने की वकालत करने वाले मौलाना सलमान नदवी ने अपने उपर लगे रिश्वत के गंभीर मामले में सफाई पेश करते हुए कहा कि अमरनाथ मिश्रा का आरोपी बेबुनियाद है और ऐसी कोई डील की बात नहीं कही गई है.

उन्होंने कहा, असल में वह नहीं चाहते हैं कि राम मंदिर बने. यह विवाद सुलझाया जा सके. सलमान नदवी ने अमरनाथ मिश्रा पर आरोप लगाया कि वो राम मंदिर निर्माण में रोड़ा बन रहे हैं. इसी के साथ उन्होंने अब कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे. मौलाना कहते हैं कि, ‘अब हमलोगों ने 14 मार्च तक अपनी सारी मुहिम रोक दी है. हम इंतजार कर रहे हैं कि अदालत 14 मार्च को क्या कहती है और वह फैसला किस तरह करती है.’

दरअसल, अयोध्या सदभावना समन्वय समिति के महासचिव अमरनाथ मिश्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी और  मौलाना नदवी की पांच फरवरी को लखनऊ के नदवा कॉलेज में मुलाकात हुई थी. इस दौरान इमाम कौंसिल के महासचिव हाजी मसरूर खान भी मौजूद थे. इस दौरान नदवी ने हमसे प्रस्ताव मांगा था तो साथ में पांच हज़ार करोड़ रुपये, दौ एकड़ ज़मीन और राज्यसभा की सीट मांगी थी.

अमरनाथ मिश्रा ने मौलाना के खिलाफ लखनऊ के हसनगंज थाने में तहरीर भी दी है. तहरीर में मौलाना पर झूठ बोलने और नदवा कालेज में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कराने की मांग की गई है.

मिश्रा ने NDTV से कहा कि ‘मौलाना नदवी से मैं मिलने इसमी यूनिवर्सिटी नदवा में गया था. जब हम बातचीत के बाद बाहर निकल रहे थे तब वह भी हमारे साथ आये और आने के बाद बोले की आप मोदी जी और योगी जी से बात करिये और हमको राज्यसभा का सदस्य बना दें. हम देश के मुसलमानों को बीजेपी के साथ करेंगे और 200 एकड़ जमीन हमें अयोध्या में योगी जी दे दें. 5000 करोड़ रुपये दिलवा दीजिए हम वहां यूनिवर्सिटी बना लेंगे.’

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