जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। जिसको लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है। माना जा रहा है कि उन्होने अपने चाचा मौलाना अरशद मदनी से मनमुटाव के चलते इस्तीफा दिया है। जानिए मौलाना महमूद मदनी के विवादित बयान जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ बयान इस साल काफी चर्चा में रहे थे। उन्होने अपने एक बयान में कहा था कि वह ओवैसी  को भारतीय मुसलमानों का नेता नहीं बनने देंगे। मौलाना मदनी ने कहा था, ओवैसी को इंडियन मुस्लिम का नेता नहीं बनने देंगे। उन्हे केवल आंध्रा और तेलंगाना तक ही सीमित होना पड़ेगा। उन्होने कहा कि उन्हे कतई मंजूर नहीं की ओवैसी हैदराबाद से बाहर निकले। उन्होने कहा कि ओवैसी को मुस्लिमों का नेता बनना है तो हैदराबाद के मुसलमानो का नेता बनने। वहीं उनका दूसरा बयान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा हुआ है। जिसमे उन्होने अटल बिहारी की जमकर तारीफ़ें की थी। उन्होने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी भारत रत्न ही नहीं बल्कि अनमोल रत्न थे। जिनका कोई मोल नहीं था। इस दौरान मदनी ने अटल बिहार की वाजपेयी की तारीफ में एक शाइर भी पड़ा। उन्होंने कहा कि बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा। हुआ करता है सदियों में कोई ऐसा बशर पैदा। बता दें कि मदनी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे थे। इन दोनों बयानों के सामने आने के बाद माना जा रहा था कि उनकी बीजेपी के साथ नज़दीकियां बढ़ रही थी। हालांकि इस बारें में कभी कोई खास वजह देखने को नहीं मिली।

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